मेरठ और आसपास के जिलों में भी आईटीसी के तहत की गई टैक्स चोरी पकड़ी जा रही है। दरअसल, जीएसटी लागू होने के बाद फर्जी तरीके से बनाई गई फर्मों के जरिए गोरखधंधा चल रहा है। ऐसी फर्मों को चिन्हित किया जा रहा है, जिन्होंने पांच करोड़ रुपये से ज्यादा का आईटीसी क्लेम लिया है।
इसके अलावा वह फर्में भी रडार पर हैं, जो जीएसटी लागू होने के बाद बनाई गई हैं। इसके पीछे सबसे खास वजह यह है कि पांच करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी पकड़े जाने पर संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता है।
विभाग के अफसरों का मानना है कि टैक्स चोरी को रोकने के लिए जालसाजों को जेल भेजा जाना जरूरी है। तभी टैक्स चोरी पर अंकुश लग सकेगा। सीजीएसटी सूत्रों ने बताया कि जिन फर्मों को रडार पर लिया गया है, उनमें से कई के बैंक खाते आईटीसी क्लेम लेने के बाद बंद हो गए।
मोबाइल नंबर भी या तो बंद कर दिए गए या बदल दिए गए हैं। जीएसटी काउंसिल का मुख्य फोकस अब इस तरह के टैक्स चोरी के मामलों पर होगा, जिनमें बिलबुक के जरिए फर्जीवाड़ा, टर्नओवर छिपाकर, रिफंड के जरिए, फर्जी बिल बनाकर और तथ्यों को छिपाकर फर्जीवाड़ा किया गया होगा। सीजीएसटी अधीक्षक पंकज त्यागी ने बताया कि आईटीसी क्लेम के जरिए फर्जीवाड़ा करने वाले रडार पर हैं। टीमें ऐसी फर्मों को चिन्हित कर कार्रवाई कर रही हैं।
ऐसे कर रहे फर्जीवाड़ा
जालसाज बड़े पैमाने पर फर्जी टैक्स इनवॉइस तैयार करते हैं। इसके बाद इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करते हैं। फर्जी कंपनियां को सिर्फ कागजों में बनाते हैं। कंपनियों का कहीं कोई ऑफिस नहीं होता है।
इन कंपनियों को जीएसटी के तहत पंजीकृत भी करा दिया जाता है। कामकाज के फर्जी बिल बनाए जाते हैं। बिना किसी लेन-देन के कंपनियों के नाम पर व्यापार दिखा कर टैक्स इनवॉइस तैयार कर लेते हैं। सरकार इन्हें रिफंड भी देती है।