अचानक एक दिन उसके खाते में 7.82 करोड़ रुपये इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में जमा हुए। इतनी बड़ी राशि अकाउंट में आने पर मैनेजर को शक हुआ। उसने मेरठ के सीजीएसटी कमिश्नर को इस संबंध में सूचित किया। मामले की जांच कराई गई।
पता चला कि आरोपी ने दिल्ली की पांच फर्मों से माल लेना बताकर उसे आगे एक्सपोर्ट दर्शाकर सरकार से यह पैसा जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट के तौर पर लिया था। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने किसी फर्म से कोई माल नहीं लिया, न ही उसे आगे एक्सपोर्ट किया था। कोर्ट में केस के विवेचक कुलदीप सिंह और असिस्टेंट कमिश्नर अंकित गहलोत भी मौजूद रहे।
सीजीएसटी अधीक्षक पंकज त्यागी ने बताया कि यह रिफंड सितंबर और अक्तूबर 2018 में लिया गया था। टीम ने 16 नवंबर 2019 को संबंधित बैंक से 7.69 करोड़ रुपये की राशि सरकारी खजाने में जमा कराई। इसके बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया।