बताया गया कि सबसे पहले जबलपुर निवासी मनु कटारे टैंक का ढक्कन खोलकर अंदर उतरा। कुछ ही देर में उसकी हालत बिगड़ने लगी। उसे बचाने के प्रयास में अन्य छात्र भी एक-एक कर टैंक में उतर गए और जहरीली गैस की चपेट में आकर अंदर फंस गए।
छात्रों के शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और सभी को टैंक से बाहर निकाला। सूचना पर पहुंची पुलिस ने छात्रों को रामकृष्ण मिशन सेवा आश्रम और सौ शैया अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने चार छात्रों को मृत घोषित कर दिया।
18 अगस्त को गुरुकुल पहुंचा था विशु
विशु शर्मा दो भाइयों में बड़ा था। उसका छोटा भाई शिवम माता-पिता के साथ प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में रहता है। परिजनों के अनुसार, विशु संस्कृत की शिक्षा लेने के लिए मथुरा-वृंदावन गया था और कक्षा 11 में पढ़ रहा था। उसने 51 हजार रुपये में प्रवेश लिया था।
परिजनों के अनुसार, विशु 18 अगस्त को गुरुकुल पहुंचा था। उसकी मौत की सूचना मिलने पर प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष सुदेश कुमार समेत परिवार के लोग मथुरा पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद बुधवार शाम तक शव के हस्तिनापुर पहुंचने की संभावना जताई गई है।
गुरुकुल में 200 से अधिक छात्रों के पढ़ने की जानकारी
बताया गया कि जिस परिसर में गुरुकुल संचालित हो रहा है, वहां करीब एक वर्ष पहले तक उमा कमला नाम से गेस्ट हाउस चलता था। बाद में आशीष शर्मा ने जमीन किराये पर लेकर गुरुकुल का संचालन शुरू किया। परिसर में 200 से अधिक छात्रों के संस्कृत शिक्षा ग्रहण करने की जानकारी है, जबकि वर्तमान में करीब 100 छात्र रह रहे थे। यहां कक्षा छह से 12वीं तक की पढ़ाई होती है।
हादसे के बाद गुरुकुल संचालक के मौके से चले जाने की बात भी सामने आई है। परिसर से गुरुकुल का नाम लिखा बोर्ड हटाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।