मेरठ। टीपीनगर थाना क्षेत्र के पूठा गांव में मंगलवार शाम हाईटेंशन लाइन से निकली चिंगारी से किसान के घेर में खड़े पेट्रोल के चार टैंकरों में भीषण आग लग गई। एक टैंकर में पेट्रोल भरा था, जबकि तीन खाली थे। कुछ ही देर में आग से पास में बना ऑफिस भी जलने लगा। घेर में काम करने वाले हेल्पर निक्कू निवासी भलसाना और चालक रोहित निवासी बरनावा, बागपत आग से झुलस गए। आरएएफ, परतापुर और पुलिस लाइन से छह दमकल वाहन मौके पर पहुंचे। दमकलकर्मियों ने दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
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मेरठ के प्रभारी सीएफओ मनु शर्मा के मुताबिक पूठा गांव में हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल के डिपो हैं। यहां से टैंकरों में पेट्रोल भरने के बाद पेट्रोल पंपों पर आपूर्ति होती है। पूठा गांव में जाटों वाले मंदिर के पास किसान शैली चौधरी का घेर है। जिसको शैली ने गांव के ही लोकेश चौधरी को किराए पर दे रखा है। घेर के ऊपर से हाईटेंशन की लाइन गुजर रही है। पेट्रोल की सप्लाई करने वाले चार टैंकर घेर में खड़े थे। मंगलवार शाम करीब साढ़े छह बजे 33 हजार की लाइन में चिंगारी और ब्लास्ट होने से टैंकरों में आग लग गई। एक टैंकर में पेट्रोल होने की वजह से आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। घेर में ही क्रिकेट खेल रहे युवकों ने शोर मचा दिया। ग्रामीणों ने तुरंत सूचना पुलिस को दी। जिसके बाद 108 आरएएफ बटालियन अपने चार दमकल वाहनों के साथ मौके पर पहुंची और आग बुझानी शुरू कर दी। जिसके बाद घंटाघर और पुलिस लाइन से छह फायर ब्रिगेड की गाड़ी मौके पर पहुंची। दमकलकर्मी भीषण गर्मी में आग काबू पाने के प्रयास में जुट गए। रात साढ़े आठ बजे दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। सीएफओ मनु शर्मा ने बताया कि आग से कोई जनहानि नहीं हुई है। घेर में काम करने वाला हेल्पर निक्कू और चालक रोहित आग से झुलस गए। जिनका उपचार कराया जा रहा है। हाई टेंशन की लाइन की चिंगारी से आग लगने की बात सामने आई है, फिर से आग के कारणों की भी जांच की जा रही है।
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बीड़ी से आग लगने की भी चर्चा बीड़ी से भी आग लगने की भी गांव में चर्चा है। ग्रामीणों का कहना है कि घेर में बने ऑफिस में कुछ हेल्पर और चालक बीड़ी पी रहे थे। बीड़ी पीने के बाद उन्होंने बिना बुझाए अहाते में खड़े टैंकरों के पास फेंक दी। जिससे आग लग गई और तेजी से फैलती चली गई। आग से लाखोंं रुपये का नुकसान बताया जा रहा है।
... दस हजार की आबादी था खतरा मेरठ। पूठा गांव में आग लगने के बाद अफरातफरी मच गई। यदि आग पर समय रहते काबू नहीं पाया जाता तो तो दस हजार की आबादी पर खतरा था। इसके अलावा आग पास में ही स्थित 108 आरएएफ कैंप तक भी पहुंच सकती थी। तीन अन्य टैंकरों में भी पेट्रोल होता तो आग पर काबू पाना मुश्किल होता। घटनास्थल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर हिंस्दुस्तान पेट्रोलियन और इंडियन ऑयल के गोदाम हैं। यदि आग वहां तक पहुंच जाती तो भीषण हादसा हो सकता था। सीएफओ मनु शर्मा ने समय पर पहुंचने पर आरएएफ का आभार प्रकट किया। - ब्लास्ट होता तो जा सकती थी कई लोगों की जान आग लगने के बाद थाना परतापुर और टीपीनगर पुलिस भी मौके पर पहुंची और यहां खड़े लोगों को दौड़ा दिया। पुलिस और अग्निशमन टीम को खतरा था कि टैकरों में जिस तरह से आग लगी है, उससे टैंकरों में ब्लास्ट भी हो सकता था। इससे कई लोगों की जान भी जा सकती थी। दो घंटे की मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर काबू पाया।