इन बैनामों में किसानों को घोषित किए गए मुआवजे में कुछ रकम बढ़ाकर जमीन खरीदी गई जबकि बाद में चार गुना तक रकम इस तरह की जमीनों में बतौर मुआवजा लिया गया। कई जगह तो दस गुना तक मुआवजा लिया गया।
पुश्तैनी नहीं थे कृषक
शिकायत में यह बात सामने आ रही है कि ये सब लोग पुश्तैनी कृषक नहीं थे जबकि भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 में यह व्यवस्था पुश्तैनी किसानों के लिए है। शहरी क्षेत्र में दोगुना और ग्रामीण क्षेत्र में चार गुना मुआवजा देने का प्रावधान इन्हीं के लिए बनाया गया है। खरीददारों के लिए नहीं।
अधिकारियों ने खरीदीं दुकानें
इस रकम से मेरठ में तैनात रहे एक एडीएम एलए और उनके मातहत कर्मचारियों ने भी संपत्तियां खरीदीं और इसे अपनी घोषित आय में भी छुपाया। यहां तक कि अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक ही जगह प्रॉपर्टी खरीदी। एक ही कांप्लेक्स में दुकानें खरीद लीं।
आयुक्त मेरठ डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि फ्रेट कॉरिडोर और दिल्ली एक्सप्रेस वे के मुआवजे में गड़बड़झाला सामने आ रहा है। तत्कालीन एडीएम एलए, उनके मातहत कर्मचारियों, सरकार के एक पूर्व सचिव तथा कुछ लोगों का एक पूरा गिरोह काम कर रहा है। अपर आयुक्त से कहा है कि 15 फरवरी तक इसकी जांच पूरी कर रिपोर्ट दें।
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