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Exclusive: पूर्व राज्यमंत्री खा रहे गरीबों का मुफ्त राशन, 2020 में बना बीपीएल कार्ड, लगातार मिल रहा गेहूं-चावल

Wed, 10 Nov 2021 01:53 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

उत्तर प्रदेश के मेरठ में करोड़पति और लालबत्ती की गाड़ी से चलने वाले पूर्व राज्यमंत्री गराीबों को मिलने वाला मुफ्त राशन ले रहे हैं। मामला चर्चा में आते ही आपूर्ति विभाग के अफसर भी लीपापोती में लग गए।
 
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पूर्व मंत्री योगेन्द्र जाटव - फोटो : Amar Ujala Meerut
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विस्तार
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मेरठ में लालबत्ती लगी लग्जरी कारों में चलने वाले करोड़पति भी गरीबों के कोटे का मुफ्त राशन ले रहे हैं। पूर्व मंत्री योगेन्द्र जाटव के नाम से बने एक बीपीएल कार्ड पर हर महीने 10 किलो चावल और 15 किलो गेहूं लिया जा रहा है। मामला सामने आते ही आपूर्ति विभाग के अफसर लीपापोती में जुट गए हैं।
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आपूर्ति विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार मई 2020 में बसपा सरकार में मंत्री रहे योगेन्द्र जाटव के नाम से उनके भगवतपुरा के पते पर बीपीएल कार्ड संख्या 113840846379 बना। इस कार्ड में उनकी पत्नी किरन देवी, नमन, रविकुमार जाटव, अंजली के नाम दर्ज हैं। इस राशन कार्ड पर हर महीने तृतीय क्षेत्र में सुनीता गुप्ता श्यामनगर की दुकान से  मुफ्त में राशन और चावल दिया जा रहा है। 

कब-कब लिया राशन:
16 मई 2021 
27 जून 2021 
31 अगस्त 2021 
30 सितंबर 2021 
31 अक्तूबर 2021
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कैसे बना करोड़पति का बीपीएल राशन कार्ड 
खाद्य सुरक्षा अधिकार अधिनियम के तहत गरीब परिवारों को ही बीपीएल राशन कार्ड का पात्र माना जा सकता है जिसके पास पक्का मकान न हो, घर में जेनरेटर, लाइसेंसी हथियार, दो पहिया और चौपहिया वाहन आदि न हो। योगेन्द्र जाटव के पास करोड़ों की संपत्ति है। उन्हें 





मैं गरीब नहीं, हो सकता है दूसरे ने बनवा लिया हो कार्ड
बीपीएल राशन कार्ड गरीबी रेखा से नीचे वालों का बनता है। मैं उस श्रेणी में आता ही नहीं हूं। हमने अपना राशन कार्ड भी नहीं बनवाया है। हो सकता है किसी ने हमारे नाम से राशन कार्ड बनवा लिया हो और राशन लिया जा रहा हो। मैं दिखवाता हूं।--- योगेन्द्र जाटव, पूर्व राज्य मंत्री उप्र सरकार।  

जांच कराकर की जाएगी कार्रवाई
राशन कार्ड और सरकारी राशन की योजना अमीरों के लिए नहीं है। अगर पूर्व राज्यमंत्री के परिवार का बीपीएल राशन कार्ड है तो उसकी जांच कराकर निरस्त कराया जाएगा। राशन अंगूठे की छाप के बाद ही दिया जाता है। इसकी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। -राघवेन्द्र सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी।  
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