शहर घूमने आए विदेशी मेहमान भी जाम से परेशान रहे। बुधवार क ो इतिहास की जानकारी लेने चार विदेशी नागरिकों का दल मेरठ पहुंचा। दल ने मेरठ भ्रमण किया और 1857 की क्रांति के इतिहास की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि जाम के कारण उन्हें कई स्थानों पर परेशान होना पड़ा। वे अपने शोध में मेरठ के जाम का भी जिक्र करेंगे।
एंड्रयू, रशेल, रोजमेरी, गिलिन व पर्ल मेरठ में 1857 की क्रांति का इतिहास जानने आए थे। इंटेक दिल्ली के जरिए मेरठ आए इस दल को इतिहासकार डॉ. एके गांधी, डॉ. आरके भटनागर, कर्नल अमरदीप त्यागी, डॉ. अश्विनी शर्मा, पीके मौर्य आदि ने भ्रमण कराया। विदेशियों के भ्रमण का आरंभ शहीद स्मारक में स्वागत से हुआ। उन्होंने पुस्तकालय, प्रदर्शनी, कर्नल कार्माइकल स्मिथ क ा बंगला और राइम कैंटीन देखी। रेसकोर्स जो थर्ड इंफेंट्री का परेड ग्राउंड था, जहां 1857 में पहली गोली चली थी। सेंट जोंस सिमिट्री में कब्रें देखी। औघड़नाथ मंदिर में शहीद स्तंभ देखा। 200 साल पुराने सेंट जोंस चर्च के अलावा विक्टोरिया में भी भ्रमण किया। बेगमपुल, आबूलेन व अन्य बाजारों घूमे। इतिहास पर काम कर रहे विदेशियों ने पूछा कि उनके पुरखों को 1857 में क्यों मारा गया। जब उन्हें सच्चाई पता चली तो उनके मन में हिंदुस्तानियों के प्रति सम्मान बढ़ गया। वहीं लेखानगर सिमिट्री में अपने पुरखों की क ब्रों पर विदेशियों ने फूल चढ़ाए।
संग्रहालय को पुस्तकें करेंगे भेंट
विदेशी नागरिकों ने शहीद स्मारक संग्रहालय और वहां रखीं पुरानी पुस्तकें भी देखीं। उन्होंने मेरठ संग्रहालय को कुछ पुस्तकें भेंट करने का वादा किया। ये सभी विदेशी नागरिक इंपीरियल एसेसटेंस पर शोध कर रहे हैं। वे यहां 1857 की क्रांति से जुड़ी भ्रांतियां दूर करने आए थे।
पर्यटन का हब बने मेरठ
दल को भ्रमण कराने वाले इतिहासकार डॉ. एके गांधी ने बताया कि मेरठ एक ऐतिहासिक शहर है, लेकिन यहां पर्यटक आने से घबराते हैं। मेरठ की छवि एक अशांत शहर की बनी है। इस छवि को हमें मिलकर तोड़ना होगा। महाभारत सर्किट, हस्तिनापुर, सरधना के अलावा 1857 की क्रांति का महान इतिहास मेरठ से जुड़ा है। यहां आकर लोगों को काफी जानकारी मिलेगी।