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एफआईटी में धरे गए सॉल्वर गैंग को भेजा जेल, शामिल थे 3 जिलों के शातिर, जिनके दिमाग से चल रहा था खेल

Sun, 14 Oct 2018 12:02 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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सात आरोपी गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
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रेलवे ग्रुप डी परीक्षा में नकल कराने वाले सॉल्वर गैंग के खिलाफ सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। शनिवार को पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। एसटीएफ गैंग के अन्य आरोपियों की तलाश में लगी है।  

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सीओ एसटीएफ बृजेश सिंह की टीम ने शुक्रवार को गंगानगर मवाना रोड पर एफआईटी कालेज में रेलवे ग्रुप डी की परीक्षा में नकल कराते सॉल्वर गैंग को पकड़ा था। सिविल लाइन पुलिस ने सॉल्वर गैंग के सरगना सुंदर चौधरी निवासी मथुरा, शिवकांत यादव निवासी गाजीपुर सांधन इंचौली, राजसिंह निवासी जंधेड़ी गांव मवाना का रहने वाला है। 

अभय चौधरी निवासी अभयपुरा नौझील, मथुरा (सॉल्वर), आकाश सिंह निवासी वाजना नौझील मथुरा, अमित कुमार निवासी खेड़ी मनिहार, मवाना और राममेहर निवासी लोहरी बड़ौत, बागपत को जेल भेजा। सीओ ने बताया कि रेलवे के अलावा अन्य परीक्षाओं में भी यह गैंग एक्टिव रहता है। इनमें आरोपी राममेहर रक्षा मंत्रालय पुणे में चतुर्थ कर्मचारी था। आगे जानें कैसे इस फर्जीवाड़े को अंजाम देता था ये गैंग। 

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तीन जिलों के शातिर थे शामिल

रेलवे ग्रुप डी परीक्षा में नकल कराने में तीन जिलों के शातिरों का दिमाग चला। मेरठ के अलावा दूसरे जिलों में भी इस गैंग का नेटवर्क फैला हैं। परीक्षा में शातिरों का गैंग एक्टिव हो जाता है। कोचिंग सेंटरों के अलावा कॉलेज में छात्रों से ये लोग सीधा संपर्क करते हैं। पुलिस इनको जेल भेजती है और ये जमानत कराकर इस धंधे में लग जाते हैं। 

मार्च 2018 में यह गैंग दिल्ली में पकड़ा गया था। पुलिस के मुताबिक रेलवे ग्रुप डी की परीक्षा के अलावा भी अन्य परीक्षाओं में भी यह सॉल्वर गैंग एक्टिव रहा है। परीक्षा कोई भी हो, इनके पास पढ़े लिखे लड़के होते हैं। जो प्रश्न पत्रों को हल करते हैं। इनकी नजर विभागीय परीक्षाओं पर ज्यादा होती हैं। परीक्षा से पहले कोचिंग सेंटर में इसकी पूरी पटकथा तैयार होती है। कहां कहां सेंटर है और उनकी कैसे सेटिंग हो सकती है, इस प्लानिंग पर काम किया जाता है। सॉल्वर गैंग पर पुलिस की निगरानी पर भी ये नजर और जानकारी रखते हैं। 

25 हजार सॉल्वर के 
परीक्षार्थी की जगह कैसे सॉल्वर जाएगा, चेकिंग में उसको कैसे बचाया जाएगा, फिंगर प्रिंट का मिलान कर एंट्री कैसे होगी? इन बातों की जिम्मेदार गैंग की होती है। सॉल्वर को इनसे 25 हजार रुपये मिलते हैं। जबकि 75 हजार रुपये गैंग में बंटते हैं। एक परीक्षार्थी से एक लाख रुपये लिए जाते हैं। 
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15 परीक्षार्थियों के पेपर सॉल्व 
पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि 15 दिन से रेलवे ग्रुप डी की परीक्षा चल रही है। एफआईटी कॉलेज में वह 15 लोगों को नकल करा चुके है। किस किस परीक्षा सॉल्वर ने दी, इसकी जांच पड़ताल एसटीएफ ने शुरू कर दी। एसटीएफ का दावा है कि जिन परीक्षार्थियों की परीक्षा सॉल्वर ने दी, इसकी जानकारी रेलवे बोर्ड को दे दी गई है। उनकी परीक्षा निरस्त होगी या दोबारा होगी? यह रेलवे बोर्ड तय करेगा। एसटीएफ सीओ बृजेश सिंह के मुताबिक इन परीक्षार्थियों के नाम पते की जानकारी जुटाई जा रही, जिसकी रिपोर्ट वह रेलवे बोर्ड को देंगे। 

राणा गैंग था एक्टिव 
परीक्षा में नकल कराने वाले बागपत के राणा गैंग का नेटवर्क प्रदेश भर में फैला है। मेरठ एसटीएफ समेत कई एजेंसियों की राणा गैंग पर नजर रहती है। सॉल्वर गैंग पकड़ा जाए और राणा गैंग का नाम न आए, ऐसा नहीं हो सकता हैं। शुक्रवार को पकड़े गए गैंग का संबंध राणा गैंग से है या नहीं? इसकी जांच भी एसटीएफ ने शुरू कर दी है। 
 
कॉलेज में मची खलबली 
कॉलेज में सॉल्वर गैंग की जानकारी लगते ही परीक्षार्थियों में खलबली मच गई। माहौल गर्माया तो एसटीएफ ने गंगानगर और सिविल लाइन थाना पुलिस को बुलाया। पुलिस ने परीक्षार्थियों से कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है। सॉल्वर गैंग पकड़ा है। 
 
कार में बैठा था गैंग 
एसटीएफ ने बताया कि साकेत चौराहे पर एक कार में बैठकर इस गैंग का नेटवर्क चल रहा था। इनके लैपटॉप और डिवाइस सक्रिय रहते हैं। पुलिस इसकी जानकारी जुटा रही कि कहीं डिवाइस के जरिये तो सॉल्वर पेपर वर्कआउट तो नहीं कर रहा था। एसटीएफ ने पहले साकेत से पांच लोगों को पकड़ा। उसके बाद कॉलेज में परीक्षा देते अभय को गिरफ्तार किया।

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