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कपड़ा व्यापारी को गर्दन से सटाकर मारी गोली

Fri, 01 Feb 2019 03:32 AM IST
NAVEEN GUPTA ब्यूरो/अमर उजाला
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meerut - फोटो : meerut
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पुलिस के अनुसार साहिबाबाद (गाजियाबाद) के शालीमार गार्डन (मेन) निवासी रामकिशोर सिंघल (64) का मेरठ में कपड़े का कारोबार है। रामकिशोर सिंघल और उनका बेटा विनोद सिंघल स्थानीय व्यापारियों से कारोबार से संबंध में बातचीत करने बृहस्पतिवार सुबह करीब दस बजे मेरठ आए थे। विनोद खंदक बाजार में चले गए थे, जबकि रामकिशोर आनंद हास्पिटल के मालिक हरिओम आनंद से मिलने उनके हॉस्पिटल चले गए थे। मुलाकात के बाद मध्याह्न करीब 3:45 जब रामकिशोर सिंघल ई-रिक्शा से भैसाली बस अड्डा जा रहे थे, तो तेजगढ़ी चौराहे पर एचडीएफसी बैंक के पास दो बदमाशों ने उनको घेर लिया।
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एक बदमाश ने व्यापारी की गर्दन से पिस्तौल सटाकर गोली चला दी। गोली उनकी गर्दन को चीरते हुए चेहरे से पार हो गई। खून से लथपथ व्यापारी सड़क पर जा गिरा। गोली की आवाज सुनकर वहां भीड़ लग गई। सूचना पर पहुंची मेडिकल पुलिस ने घायल व्यापारी को आनंद हास्पिटल में भर्ती कराया। जहां उनका ऑपरेशन किया गया। उधर, लूट के विरोध में व्यापारी को गोली मारने की सूचना पर पुलिस महकमे में खलबली मच गई। एसपी सिटी रणविजय सिंह और एएसपी सतपाल सिंह ने मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली।
लूट का प्रयास नहीं हुआ
एसपी सिटी ने घायल व्यापारी से पूछताछ के बाद बताया कि लूट का प्रयास नहीं हुआ। व्यापारी का कहना है कि उनके पास कोई पैसा नहीं था। एक बैग जरूर था, जिसको बदमाशों ने नहीं छेड़ा। बदमाश आए, उन्हें पकड़ा और फिर गोली मारकर भाग गए।
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अस्पताल में पहुंचे व्यापारी
लूट के विरोध में गाजियाबाद के कपड़ा व्यापारी को गोली मारने की खबर शहर के व्यापारियों में dआग की तरह फैल गई। कपड़ा व्यापारी के बेटे विनोद सिंघल के साथ करीब 50-60 व्यापारी अस्पताल में पहुंचे। व्यापारियों ने इस घटना पर नाराजगी जताकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। दिनदहाडे़ वारदात हो जाने पर व्यापारियों ने हंगामा कर दिया। पुलिस ने रंजिश में गोली मारने की बात कही, तब जाकर व्यापारियों का गुस्सा शांत हुआ।
रंजिश में मारी गोली
किसी रंजिश में ही कपड़ा व्यापारी को गोली मारी गई है। कारोबार के अलावा व्यापारी का ब्याज का काम भी मेरठ में फैला हुआ है। गोली मारने के पीछे बदमाशों का क्या मकसद था, इसकी जांच कराई जा रही है। लूट के विरोध में गोली मारने की बात गलत है। -अखिलेश कुमार, डीआईजी  
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