गले की फांस बने नाजिम अपहरण केस को पुलिस ने आखिरकार दफन कर दिया है। दस साल में भी नाजिम का कोई सुराग नहीं लगा। इस मामले में तत्कालीन इंस्पेक्टर रामतीर्थ समेत तीन पुलिसकर्मियों को जेल जाना पड़ा था। पुलिस ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी दो पुलिसकर्मियों के पहले केस नाम निकाले और उसके बाद केस खत्म कर दिया है। पुलिस ने शासन को 24 पेज की रिपोर्ट भी भेजी है।
सरधना के मोहल्ला भटियारी सराय निवासी मेहराजुद्दीन का बेटा नाजिम 27 मई 2010 में लापता हो गया था। मेहराजुद्दीन की पत्नी सलमा ने आरोप लगाया था कि कि सरधना इंस्पेक्टर और अन्य पुलिसकर्मी नाजिम को लेकर आए थे।
कोर्ट के आदेश पर 9 मई 2012 को तत्कालीन सरधना इंस्पेक्टर रामतीर्थ, एसएसआई आशुतोष व सिपाही बिजेंद्र के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज कराया था। बाद में इंस्पेक्टर रामतीर्थ का डीएसपी पद पर प्रमोशन हो गया था। यह मामला सुप्रीम कोट पहुंच गया। न्यायालय ने तीनों आरोपियों को जेल भेजा था। बाद में कोर्ट से ही इनकी जमानत मंजूर हुई।
5 मई 2016 को पुलिस ने बिजेंद्र के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, जबकि डिप्टी एसपी और दरोगा के खिलाफ विवेचना जारी रखी। इस दौरान रामतीर्थ सेवानिवृत्त हो गए। विवेचना में आरोपी पुलिसकर्मियों पर से अपहरण, साजिश, और धोखाधड़ी की धारा हटा दी गई।
इस समय दरोगा आशुतोष कुमार इंस्पेक्टर बन गए हैं। एसपी देहात अविनाश पांडेय का कहना है कि आरोपी पुलिसकर्मियों ने न तो नाजिम के घर दबिश दी थी, न ही वीडियो फुटेज और न ही सर्विलांस साक्ष्य मिले। जिसके बाद केस खत्म कर रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
मेहराजुद्दीन को कोर्ट के निर्देश पर सुरक्षा मिली थी। एक सिपाही अभी भी सुरक्षा में तैनात है। मेहराजुद्दीन ने एसपी देहात से सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। एसपी देहात ने कहा कि सुरक्षा शासन के निर्देश पर या कोर्ट के निर्देश पर ही दी जा सकती है। एक गनर दिया हुआ है जिसकी रिपोर्ट भी शासन को भेजी जा रही है।