विधानसभा की एक सीट ही पलट देती है पूरी बाजी
सैयद यासिर रजा
मेरठ। मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर जीत का पैटर्न पिछले तीन चुनाव में बिल्कुल जुदा रहा है। कामन सिर्फ एक चीज़ थी, वह थी कैंट विधानसभा सीट। यहां से थोक में मिलने वाले वोट ने 2019 और 2009 के चुनाव में भाजपा की नैया पार लगाई थी। 2019 के चुनाव में इस सीट को छोड़ दिया जाए तो भाजपा एक लाख से ज्यादा वोटों से पीछे थी, लेकिन अकेले कैंट की सीट ने भाजपा के लिए बाजी ही पलट दी। इस विधानसभा क्षेत्र ने न सिर्फ भाजपा और बसपा के बीच के वोटों के अंतर को खत्म किया बल्कि 4729 वोटों से जीत दिलाने मे भी कामयाबी दिलाई। खास बात यह रही कि हाजी मोहम्मद याकूब ने पांच में से चार विधानसभा सीटों पर अच्छी खासी बढ़त बनाई थी। सिर्फ कैंट में पिछड़े और इतना पिछड़े की उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
2014 के चुनाव में प्रदेश के साथ ही पश्चिमी यूपी में भी भाजपा ने सूपड़ा साफ़ कर दिया था। भाजपा ने इस चुनाव में हर विधानसभा सीट पर अच्छी खासी बढ़त बनाई थी और 2 लाख 32 हजार वोटों से जीत का परचम लहराया था। इस चुनाव में भाजपा से राजेंद्र अग्रवाल, बसपा से शाहिद अखलाक और सपा की ओर से शाहिद मंजूर मैदान में थे। ध्रुवीकरण के आधार पर हुए इस चुनाव में भाजपा ने तो एकतरफ़ा वोट हासिल किया, लेकिन मुस्लिम मतदाताओं के बीच शाहिद मंजूर और शाहिद अखलाक को वोट लगभग बराबर के बंटे। यही वजह थी कि भाजपा ने सवा दो लाख से भी अधिक वोटों के अंतर से यहां फतह हासिल की थी।2009 के लोकसभा चुनाव में मुकाबला त्रिकोणीय था। केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और प्रदेश में बसपा की। सपा अपने वजूद की लड़ाई लड़ रही थी। भाजपा ने राजेंद्र अग्रवाल को अपना प्रत्याशी बनाया था जबकि बसपा ने मलूक नागर और सपा ने शाहिद मंजूर को उतारा था। सबसे कड़ा मुकाबला मेरठ दक्षिण में था। दक्षिण में बसपा को सबसे अधिक 44689 वोट, भाजपा को 44202 वोट और सपा को 40 218 वोट मिले थे। यानी यहां पहले नंबर पर बसपा, दूसरे पर भाजपा और तीसरे पर सपा थी। मेरठ शहर जहां मुस्लिम वोटरों की संख्या सबसे बड़ी है। वहां सपा के शाहिद मंजूर को सबसे अधिक 48826 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर भाजपा को 46708 वोट मिले थे जबकि बसपा को सिर्फ 14303 वोट मिले थे। मुकाबला हापुड़ में भी कांटे का था। हापुड़ में भाजपा को 39673 वोट, बसपा को 37970 वोट और सपा को 31063 वोट मिले थे। किठोर ऐसी सीट थी जहां भाजपा तीसरे नंबर पर रही थी। बसपा को यहां सबसे अधिक 50548 वोट और सपा को 47569 वोट मिले थे। राजेंद्र अग्रवाल को 35913 लोगों ने वोट किया था। सबसे बड़ा अंतर पैदा किया मेरठ कैंट सीट ने। यहां भाजपा को बड़ी बढ़त मिली। बढ़त करीब 28 हजार वोटों की थी, जिसने राजेंद्र अग्रवाल को संसद भवन तक पहुंचाने में मदद की।
2009 में हुआ था परसीमन, दो सीटों में हुआ था परिवर्तन
दर असल 2009 में हुए परिसीमन के बाद मेरठ सीट का गणित ही बदल गया। पहले इसमें मेरठ जिले की ही पांच विधानसभा सीटें थीं। इसमें किठोर, कैंट और मेरठ शहर के अलावा हस्तिनापुर और खरखौंदा सीटें मेरठ लोकसभा का हिस्सा थीं। परिसीमन में हस्तिनापुर को बिजनौर लोकसभा क्षेत्र में शामिल कर दिया गया और खरखौदा की जगह मेरठ दक्षिण सीट का नाम दे दिया गया। हापुड़ शहर की सीट को मेरठ से जोड़ दिया गया। सीट का नाम भी मेरठ-हापुड़ लोकसभा क्षेत्र कर दिया गया। परसीमन के बाद अब तक तीन चुनाव हुए हैं और तीनों में भाजपा ने जीत हासिल की है। तीनों बार प्रत्याशी एक ही थे राजेंद्र अग्रवाल। उन्होंने 2009 में 47 हजार वोट से 2014 में रिकार्ड 2 लाख 32 हजार वोट से और 2019 में 4729 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। यानी राजेंद्र अग्रवाल की जीत का अंतर घटता और बढ़ता रहा।
2019
उम्मीदवार-पार्टी-मेरठ कैंट-मेरठ शहर-मेरठ दक्षिण-किठोर-हापुड़-कुल
राजेंद्र अग्रवाल-भाजपा-168074-79241-122496-109222-103943-582976
हाजी मोहम्मद याकूब-बसपा-65322-109637-152210-131039-122389-580597
जीत का अंतर 4729-विजेता राजेंद्र अग्रवाल-भाजपा (पोस्टल बैलेट मिलाकर)
2014
राजेंद्र अग्रवाल- भाजपा-153448-81690-107901-94893-93966-531898
शाहिद अखलाक-बसपा-44397-46022-84564-63047-62237-300267
शाहिद मंजूर-सपा-15495-52237-48016-57460-38365-211573
जीत का अंतर 232326-विजेता राजेंद्र अग्रवाल-भाजपा (पोस्टल बैलेट मिलाकर)
2009
राजेंद्र अग्रवाल- भाजपा-65569-46708-44202-35913-39673-232065
मलूक नागर-बसपा-37441-14303-44689-50548-37970-184951
शाहिद मंजूर-सपा-15841-48826-40218-47569-31063-183517
राजेंद्र शर्मा-कांग्रेस-22696-9546-12023-6411-10303-60979
जीत का अंतर 47146-विजेता राजेंद्र अग्रवाल-भाजपा (पोस्टल बैलेट मिलाकर)