कोरोना के पीक पर जहां एक तरफ लोग जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे, वहीं इलाज और दवा के नाम पर धोखाधड़ी की जा रही थी। कोरोना काल में दवा के बजाय खड़िया बेच दी गई। ड्रग्स विभाग द्वारा लखनऊ भेजे गए चार सैंपलों की रिपोर्ट आ गई है, जो मानकों पर फेल निकली है। ड्रग्स इंस्पेक्टर अब मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं।
ड्रग इंस्पेक्टर मेरठ पवन शाक्य ने बताया कि जून 2021 में महाराष्ट्र एफडीए को फेविपिराविर के नाम की नकली दवाएं मिली थीं। इस दवा में फेविपिराविर का नाम इस्तेमाल किया जा रहा था, अंदर खड़िया थी। इसका उत्पादन मेरठ में धीरखेड़ा स्थित फैक्टरी में होना बताया गया था। हालांकि छापा मारा तो फैक्टरी में ऐसी कोई दवा नहीं मिली थी।
इस मामले में मुंबई पुलिस ने खरखौदा पुलिस को लेकर धीरखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में कार्रवाई की और फैक्टरी पर सील लगा दी थी। एक निजी अस्पताल और छीपी टैंक के एक मेडिकल स्टोर में भी यह दवा मिली थी, उनके नौ सैंपल जांच के लिए लखनऊ लैब भेजे थे, जिनकी रिपोर्ट अब आई है। इसमें चार सैंपल फेल निकले हैं। हालांकि पहले ही पता था कि यह दवाएं नकली हैं, लेकिन अब लैब जांच की रिपोर्ट से भी पुष्टि हो गई है।
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इससे पहले रुड़की में 29 जुलाई को 25 लाख रुपये की दवाई पकड़ी गई थी, तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पवन शाक्य का कहना है कि इस संबंध में मुंबई पुलिस से बात की जाएगी। उन्होंने किन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था, यह जानने के बाद उचित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
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