बढ़ती आवास जरूरतों के लिए मेडा ने किसानों को शामिल करते हुए खास योजना बनाई है। इसके तहत किसान अपनी जमीन पर खुद टाउनशिप विकसित कर सकेंगे। दो या दो अधिक किसान मिलकर कम से कम ढाई एकड़ जमीन पर इसे विकसित कर सकते हैं। इसमें किसान स्वेच्छा से मेडा का भी पार्टनर बना सकता है। जमीन का मालिकाना हक किसान के पास रहेगा। किसान-मेडा के बीच करार के तहत किसान को मुनाफे की निश्चित धनराशि मिलेगी। इस योजना से संबंधित कोई भी जानकारी मेडा किसानों को नि:शुल्क उपलब्ध कराएगा। नक्शा बनवाने का शुल्क भी मेडा वहन करेगा।
प्रदेश सरकार ने लैंड पूलिंग पालिसी सितंबर 2020 में लागू की थी। उस समय किसानों ने नियम, शर्तें कड़ी बताते हुए इस पर कोई पहल नहीं की थी। अब योगी सरकार ने इंटीग्रेटेड टाउनशिप के लिए जमीन की उपलब्धता कम करने के साथ ही कई अन्य बदलाव किए हैं। मंगलवार को प्राधिकरण उपाध्यक्ष अभिषेक पांडेय ने योजना का लांच करते हुए बताया कि मेरठ में देश की पहली रैपिड रेल आ रही है।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे बन चुका है, जिससे दिल्ली जाना आसान हो गया है। इसके अलावा मेरठ-गढ़, मेरठ-बुलंदशहर, मेरठ-बिजनौर हाइवे का चौड़ीकरण हो रहा है। ऐसे में टाउनशिप के लिए शहर के भीतर विकास की संभावनाएं कम हैं। इसके चलते हाइवे और एक्सप्रेस-वे के आासपास इंटीग्रेटेड टाउनशिप को विकसित कर न्यू मेरठ बसाया जाएगा। लैंड पूलिंग योजना के तहत किसान अपनी जमीन में टाउनशिप विकसित कर सकते हैं। इसके लिए किसान प्राधिकरण में उनसे संपर्क कर सकते हैं।
किसानों को न केवल नि:शुल्क परामर्श दिया जाएगा बल्कि टाउनशिप का नक्शा भी मेडा नि:शुल्क बनवाएगा। एक महीने के भीतर ही मानचित्र को ऑनलाइन पोर्टल पर भी डाल दिया जाएगा और प्राथमिकता पर इसे निस्तारित किया जाएगा। दूसरी ओर अगर किसान चाहे तो मेडा उनकी जमीन पर टाउनशिप डवलप करेगा। विकसित करने के बाद मुनाफे में भी किसान को हिस्सा मिलेगा और नियम अनुसार प्लॉट भी दिया जाएगा।
उद्योगों के लिए जमीन देने पर पांच साल तक मुआवजा
योगी सरकार की लैंड पूलिंग योजना से किसानों या भूस्वामियों की स्वेच्छा से नए उद्योगों को लगाने के लिए जमीन लेने में मदद मिलेगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार भूस्वामियों को 5 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रतिमाह के हिसाब से 5 सालों तक मुआवजा देगी। साथ ही साथ भूस्वामियों की 25 प्रतिशत विकसित भूमि लाटरी के माध्यम से वापस की जायेगा।