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किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी

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खरखौदा। गांव फफूंडा बाईपास पर एनएचएआई ने महज 600 मीटर की सर्विस रोड दी है। जिससे दो किलोमीटर से अधिक लंबाई में बाईपास के सहारे कोई सर्विस रोड नहीं है। जिससे किसानों को खेतों में जाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव फफूंड़ा में सोमवार को उन्होंने बैठक कर सर्विस रोड नहीं बनाए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
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राष्ट्रीय राजमार्ग 235 के निर्माण में परिस्थितियों के मद्दे नजर समय-समय पर कई बदलाव किए गए। गांव फफूंड़ा में बनाए करीब 2.75 किलोमीटर लंबे बाईपास पर एक अंडरपास दिया है। वहीं, फफूंडा-पीपलीखेड़ा संपर्क मार्ग करीब दो दर्जन गांवों को जोड़ता है। फफूंडा के ग्रामीणों ने इस पर अंडरपास की मांग की थी। एनएचआई ने ऐसा न करके हापुड़ रोड से इस मार्ग तक बाईपास के दोनों ओर करीब 600 मीटर की सर्विस रोड दी। पीपलीखेड़ा संपर्क मार्ग से आगे की ओेर बाईपास के सहारे फफूंडा के किसानों की सैकड़ों बीघा कृषि भूमि है। बाईपास की ऊंचाई बीस से तीस फिट है। जिस कारण बाईपास के सहारे लगी कृषि भूमि का रास्ता पूर्ण रूप से बंद हो गया है। इससे किसानों को खेतों में पहुंचना मुश्किल हो रहा है। बाईपास के सहारे एनएचएआई की जमीन का पहले किसान रास्ते के रूप में प्रयोग कर रहे थे। बरसात में बाईपास की मिट्टी का कटान हुआ तो निर्माण कंपनी ने बाहर से न लाकर बाईपास के दोनों ओर से मिट्टी उठाकर डाल दी। जिससे उक्त भूमि में गहरे गड्ढेे हो गए। जिससे छह माह से उन सभी किसानों का रास्ता पूर्ण रूप से बंद है। गांव फफूंडा निवासी भारतीय यूनियन भानू के पश्चिम के अध्यक्ष राजीव अधाना के आवास पर सोमवार को किसानों की बैठक हुई। इसमें अधिकारियों से बाईपास के सहारे सर्विस रोड की मांग की। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन किया जाएगा। बैठक में नीरज खारी, नीरज अग्रवाल, मांगेराम, मोहित भड़ाना, दीपक शर्मा, प्रवेश कुमार व संजय कुमार समेत कई लोग मौजूद रहे।
बाईपास के दोनों ओर एनएचएआई की जमीन पड़ी है। उसी को किसान रास्ते के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे। उसमें अब गहरे गड्ढे हो जाने से आवागमन बंद हो गया है। किसानों द्वारा दी गई शिकायत उनके पास पहुंची। बाईपास के दोनों ओर मिट्टी को समतल कराकर उसमें कंकरीट डलवाकर दोबारा से रास्तेे का निर्माण करा दिया जाएगा।-डीके चतुर्वेदी, परियोजना निदेशक एनएचएआई
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