कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों को संबोधित करते कृषि वैज्ञानिक स्रोत स्वयं
हस्तिनापुर। कस्बे के कृषि विज्ञान केंद्र में बृहस्पतिवार को उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर जागरूकता अभियान कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें क्षेत्र के किसानों को मृदा स्वास्थ्य सुधारने और खेती की लागत घटाने के उपाय बताए गए।
विशेषज्ञों ने बताया कि किसान फसलों में असंतुलित रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं। इससे मृदा की उर्वरता लगातार घट रही है। फसलों में रोग-कीटों का प्रकोप बढ़ रहा है। परिणामस्वरूप कृषि उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। किसानों को संतुलित उर्वरक के उपयोग को अपनाने की सलाह दी गई। केंद्र प्रभारी डॉ. नवीन चंद्र ने फसल चक्र अपनाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि एक ही फसल बार-बार बोने से मिट्टी की गुणवत्ता खराब होती है। फसल चक्र अपनाने से मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बना रहता है। हरी खाद ढैंचा और वर्मी कंपोस्ट के उपयोग से भूमि की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है।
सस्य वैज्ञानिक डॉ. शुभम आर्या ने सूक्ष्म पोषक तत्वों की भूमिका समझाई। उन्होंने बताया कि जिंक, आयरन, सल्फर जैसे तत्व फसलों की वृद्धि और उत्पादन में महत्वपूर्ण हैं। डॉ. जेके आर्या ने जैविक खेती के घटकों की जानकारी दी। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की अपील की।
कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों को संबोधित करते कृषि वैज्ञानिक स्रोत स्वयं