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Meerut News: मंडौरा में किसान संगोष्ठी, गन्ना कीट प्रबंधन पर जोर

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संवाद न्यूज एजेंसी
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दौराला। आईसीएआर–राष्ट्रीय समेकित नाशीजीव प्रबंधन अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली ने मंगलवार को मंडौरा गांव में किसान संगोष्ठी आयोजित की। इसका उद्देश्य गन्ना उत्पादक किसानों को समेकित नाशीजीव प्रबंधन तकनीकों की जानकारी देना था। उन्हें व्यावहारिक रूप से इन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रधान वैज्ञानिक श्रवण मनभर हलधर ने की। उन्होंने गन्ना आधारित आईपीएम मॉडल गांव विकास परियोजना के तहत किसानों को रोग और कीट प्रबंधन की वैज्ञानिक विधियां बताईं। वैज्ञानिकों ने ट्राइकोडर्मा और बैसिलस प्रजातियों के मिश्रित प्रयोग पर जोर दिया। इससे गन्ने की जड़ों और तनों को विभिन्न रोगों से सुरक्षा मिलती है। नीम तेल, फेरोमोन ट्रैप और ट्राइकोकार्ड जैसे जैविक साधनों से कीटों का प्रभावी नियंत्रण संभव है। शीर्ष प्ररोह छिद्रक (टॉप शूट बोरर) जैसे प्रमुख कीट को ट्राइकोकार्ड से नियंत्रित किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने रासायनिक कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से बचने की सलाह दी।
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कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मंडौरा को गन्ना कीट प्रबंधन में आत्मनिर्भर आईपीएम मॉडल गांव बनाना है। किसानों को 100 ट्राइकोकार्ड, 20 लीटर जैविक कंसोर्सिया, 20 लीटर नीम तेल और फिश ऑयल वितरित किए गए। उत्तर प्रदेश सरकार के सर्वश्रेष्ठ किसान पुरस्कार से सम्मानित वेदव्रत आर्य ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि जैविक साधनों से गन्ने की पैदावार और गुणवत्ता में सुधार होता है।
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