दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर किसानों ने आरपार की लड़ाई लड़ने का एलान कर मेरठ कमिश्नरी पर डेरा डाल लिया है। रविवार सुबह भी सैकड़ों की संख्या में मौजूद किसानों ने धरना प्रदर्शन किया। किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया और सरकार को किसान विरोधी बताया।
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वहीं अधिकारियों द्वारा किसानों की बात न सुने जाने से नाराज किसानों ने कमिश्नरी पार्क में उग्र प्रदर्शन किया। किसानों ने अर्धनग्न होकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वहीं किसानों के आंदोलन को बढ़ता देख कमिश्नरी को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पुलिस अधिकारी मौके पर डेरा डाले हुए हैं। कमिश्नरी के गेट पर तैनात पुलिस व पीएसी बल से टकराव की स्थिति बनती दिख रही है।
धरना प्रदर्शन में बोलते सपा नेता अतुल प्रधान
- फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि एक समान मुआवजा न मिलने का कई माह से विरोध कर रहे किसानों ने पदयात्रा का एलान किया था। जिसके बाद चार दिनों तक 50 किलोमीटर का सफर पूरा कर पदयात्रा शनिवार शाम को मेरठ कमिश्नरी पहुंची। रात भर से किसान यहीं डटे रहे लेकिन प्रशासन ने उनकी बात नहीं सुनी।
किसान कल्याण समिति के बैनर तले हो रहे इस धरने में 19 गांवों के किसान शामिल हैं। सभी किसान एनएचएआई द्वारा अधिग्रहीत की गई जमीन के मामले में नाखुश हैं। उनका कहना है कि गांवों के लिए अलग-अलग रेट का मुआवजा तय किया गया है। जबकि हाल ही में बनाए गए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे में एकसमान मुआवजा दिया गया था। डासना से 30 अक्तूबर को सुबह 11 बजे शुरू हुई पदयात्रा ने कलछीना, मुरादाबाद, भूडबराल में रात्रि विश्राम किया। पदयात्रा का समापन शनिवार शाम 4:30 बजे कमिश्नरी पार्क में हुआ।
ये गांव हो रहे प्रभावित
भटजन, पलौता, मुरादाबाद, फजलगढ़, भोजपुर, शकूरपुर आदि गांव शामिल हैं।
धरना प्रदर्शन में शामिल किसान महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
धारा 144 लागू होने के बाद धरना
जिले में धारा 144 लागू है। अयोध्या प्रकरण को लेकर आने वाले फैसले से पहले शहर और देहात में पुलिस अधिकारी सक्रिय हैं। ऐसे में किसानों की पदयात्रा और फिर कमिश्नरी के सामने पार्क में तंबू लगाकर किसानों ने प्रदर्शन किया। पुलिस फोर्स की मौजूदगी में धारा 144 का उल्लंघन कर पदयात्रा निकाली गई और धरना प्रदर्शन किया गया। किसान पदयात्रा को देखते हुए शनिवार सुबह नौ बजे ही कमिश्नरी को छावनी में तब्दील कर दिया था।
सीओ सरधना पंकज सिंह, सीओ सिविल लाइन हरिमोहन सिंह और 12 थानों की फोर्स तैनात कर दी गई। किसानों का काफिला शाम पांच बजे कमिश्नरी पर पहुंचा। पुलिस फोर्स ने कमिश्नरी का गेट बंद कर दिया। जिसके बाद किसान कमिश्नरी पार्क में धरने पर बैठ गए।
एसपी सिटी का कहना है कि धारा 144 के संबंध में देखा जाएगा। सपा नेता अतुल प्रधान सहित कई लोगों के खिलाफ एक सप्ताह पहले सर्किट हाउस के सामने शव रखकर जाम लगाने के संबंध में केस दर्ज हुआ था।
क्या बोले किसान
हमें मुआवजे की राशि अन्य गांवों से कम दी गई है। मेरी साढ़े 16 बीघा जमीन एक्सप्रेस-वे में गई है। -सुलेमान, कुशालिया गांव
तीन बीघा जमीन लेकर हमारे साथ धोखा किया है। अब कोई सुनने के लिए तैयार नहीं है। -जाकिर, सौलाना गांव
एक्सप्रेस-वे मेें गरीबों के साथ धोखा किया है। पता ही नहीं चला कि किसको किस आधार पर मुआवजा दिया। मेरी भी ढाई बीघा जमीन थी। -महबूब, सौलाना गांव
मेरी 14 बीघा जमीन थी। लेकिन मेरी चार बीघा जमीन का मुआवजा दूसरे को दे दिया। -इस्लाम, कुशालिया, गांव
हमारी भूमि का कोई हिसाब नहीं दिया गया। मुआवजा भी अलग-अलग दिया गया है। जिससे हम काम नहीं होने देंगे। मेरी चार बीघा जमीन थी। -जुनैद, कांशी गांव
...प्रतिकर अलग क्यों
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट में एक ही गांवों में प्रतिकर रेट अलग थे। वर्ष 2010 में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के नोटिफिकेशन में 3500 और 4400 रुपये प्रतिवर्ग मीटर की दर से प्रतिकर दिया गया। जबकि साल 2014 के ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में 2102 और 2732 की दर से प्रतिकर दिया गया।