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Meerut News: फसली ब्याज दर नहीं घटने से किसानों में आक्रोश, प्रदर्शन किया

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संवाद न्यूज एजेंसी
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माछरा। प्रदेश में बीपैक्स के जरिए जिला सहकारी बैंकों से किसानों को मिलने वाले फसली ऋण की ब्याज दरों में दोहरा मानदंड अपनाया जा रहा है। इसके तहत विभिन्न सहकारी खाद समितियों के चेयरमैनों ने धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन एआर मेरठ, डीआर मेरठ एवं सहकारी बैंक अध्यक्ष विमल शर्मा को ज्ञापन सौंपा।
करीब दो माह पूर्व शासन ने किसान हित में बीपैक्स के जरिए जिला सहकारी बैंकों से मिलने वाले तीन लाख रुपये तक के फसली ऋण पर सशर्त ब्याज दरें घटाई थी। इसमें निर्धारित समयाविधि 365 दिनों में ऋण अदायगी पर किसान से सात प्रतिशत के बजाय तीन प्रतिशत ब्याज लिया जाएगा। जिसमें प्रदेश के जिलों में यह नियम लागू कर फसली ऋण पर तीन प्रतिशत ब्याज लिया जा रहा है। लेकिन मेरठ सहकारिता विभाग अभी पुराने ढर्रे पर काम कर किसानों से सात प्रतिशत ही वसूल कर रहा है।
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फतेहपुर नारायण सहकारी खाद समिति चेयरमैन संदीप बलराज त्यागी व अन्य समितियों के चेयरमैन ने सोमवार को सहकारी बैंक कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया और एआर मेरठ और डीआर मेरठ के साथ सहकारी बैंक अध्यक्ष को ब्याज दरों को कम करने के लिए ज्ञापन सौंपा।
सहकारी बैंक के एआर दीपक थरेजा का कहना है कि किसानों का किसी भी दशा में अहित नहीं होने दिया जाएगा। शासन के ब्याज दरों में छूट के नियम मेरठ में भी लागू किए जा चुके हैं। किसानों को फसल ऋण 7 प्रतिशत की बजाय 3 प्रतिशत ही देना होगा। इस दौरान चकरेश त्यागी, योगेंद्र चौहान, नवीन त्यागी, प्रदीप त्यागी, पवन, धर्मेंद्र मलिक आदि सहकारी खाद समिति चेयरमैन मौजूद रहे।
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सहकारी ऋण पर तीन फीसदी ब्याज की मांग तेज, भाकियू ने जारी किया पत्र

हस्तिनापुर। जिला सहकारी बैंक लिमिटेड मेरठ की ओर से जारी पुराने निर्देशों का हवाला देते हुए भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष अनुराग चौधरी ने सहकारी समितियों से किसानों से केवल तीन फीसदी ब्याज वसूलने की मांग की है। संगठन ने आरोप लगाया कि कई समितियों में किसानों से अधिक ब्याज जमा कराने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे किसानों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। भाकियू जिलाध्यक्ष ने किसानों को जारी सूचना में कहा कि तीन लाख रुपये तक के अल्पकालीन कृषि ऋण पर समय से भुगतान करने वाले किसानों से केवल तीन प्रतिशत ब्याज ही लिया जाना चाहिए। पत्र के अनुसार यदि किसान ऋण लेने की तिथि से 365 दिनों के भीतर अथवा 30 जून तक, जो भी पहले हो, भुगतान कर देता है तो उसे ब्याज अनुदान का लाभ मिलेगा। अनुराग चौधरी ने कहा कि यदि किसी समिति में निर्धारित दर से अधिक ब्याज मांगा जाता है तो किसान इसकी शिकायत संगठन से करें।
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