शामली जिले में संपूर्ण बकाया गन्ना भुगतान नहीं होने को लेकर शुगर मिल के बॉयलर हाउस में किसानों की महापंचायत आयोजित की गई। जिसमें 91 दिन तक धरने के बाद भी बकाया गन्ना भुगतान नहीं देने पर किसानों, वक्ताओं ने रोष प्रकट किया। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि पता नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गन्ना मूल्य को लेकर क्यों झूठ बोलते हैं। यदि शामली में किसानों पर प्रशासन ने लाठीचार्ज किया तो महाभारत शुरू हो जाएगा। हर जगह के किसान शामिल होंगे।
नरेश टिकैत ने कहा कि सरकार की अनदेखी के कारण ही मिल प्रशासन जान बूझकर किसानों का बकाया गन्ना भुगतान नहीं कर रहा है। अब मिल का गुल्ला फंस गया है या तो गुल्ला टूटेगा या फिर नाल फटेगी। कहा कि प्रशासन भी किसानों की समस्या को लेकर गंभीर नहीं है। कभी शामली मिल का देशभर में नाम था। यहां का किसान भी फक्र महसूस करता था कि शामली मिल में गन्ना सप्लाई किया जाता है, लेकिन आज हालत ज्यादा खराब है। किसानों की हिम्मत है जो 90 से अधिक दिन से धरने पर बैठे हुए हैं। यूपी सरकार ज्यादा लापरवाह है। हरियाणा से लेकर पंजाब में गन्ना मूल्य घोषित कर दिया गया।
नरेश टिकैत ने कहा कि एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जल्द ही गन्ना मूल्य 450 रुपये प्रति क्विंटल तक किया जाएगा, लेकिन आज तक नहीं किया गया। पता नहीं पीएम झूठ क्यों बोलते हैं। हमारी समझ में नहीं आ रहा। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि बिजली की व्यवस्था सुधरी है। कहा कि सभी किसान है। किसान के लिए सम्मान ही सब कुछ होता है। जिसके लिए आज शामली के किसान धरना देने को मजबूर है। कहा कि यदि प्रशासन ने जबरदस्ती धरनारत किसानों को उठाने का प्रयास किया तो इसका अंजाम अच्छा नहीं होगा। यदि किसानों पर लाठीचार्ज किया या फिर उन्हें उठाया गया तो मिल में ही महाभारत शुरू हो जाएगा। नरेश टिकैत ने कहा कि वह किसानों और कमेटी के साथ है, जो भी उनका निर्णय होगा, मान्य होगा।
टिकैत ने शामली में दो जगह धरना चलाने को लेकर कहा कि धरना और किसान एक है एक और ही रहेंगे। कुछ लोग किसानों के बीच खटास पैदा करना चाहते हैं। ऐसे लोगों से बचकर रहना चाहिए। मिलकर ही किसी भी जंग को जीता जा सकता है। धरना संयोजक संजीव शास्त्री ने कहा कि प्रशासन किसानों को जबरदस्ती धरना स्थल से उठाने का प्रयास कर रहा है, जिसे सहन नहीं किया जाएगा। रालोद विधायक अशरफ अली, प्रसन्न चौधरी ने भी सरकार के खिलाफ खूब भड़ास निकाली। महापंचायत के अंत में एक कमेटी गठित की गई, जो देर रात में धरना आगे चलेगा या नहीं, इसका निर्णय लेगी। महापंचातय में शामली के साथ-साथ बागपत, मेरठ, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर के किसान भी शामिल रहे।