किसान आंदोलन में रालोद ने आगे बढ़कर काम किया। इसी का परिणाम है कि जिला पंचायत चुनाव में रालोद के समर्थन से पांच सदस्य जीतकर आए हैं जबकि सत्ताधारी भाजपा समर्थित सदस्यों की संख्या चार ही रह गई। रालोद के साथ मिले सपा के दो व निर्दलीय सदस्यों ने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भी रालोद-सपा गठबंधन के उम्मीदवार की स्थिति को मजबूत कर रखा है।
कोरोना संक्रमण काल में पार्टी प्रमुख चौधरी अजित सिंह के निधन से पार्टी को झटका जरूर लगा लेकिन अब कमान जयंत चौधरी के हाथों में है। किसान आंदोलन के चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद की स्थिति मजबूत होती देख दूसरे दलों के नेताओं का रुख भी अब रालोद की तरफ होने लगा है। इस झुकाव के पीछे नेताओं को यह उम्मीद है कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेगी।
इन नेताओं ने थामा रालोद का दामन
सपा नेता उमेश कुमार रालोद में शामिल होकर जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़े और जीत हासिल की। जिला पंचायत सदस्य बबली के पति राकेश ने भी कुछ दिनों पूर्व रालोद की सदस्यता ली थी। इसके अलावा महिला आयोग की सदस्य रहीं प्रियंवदा तोमर भी रालोद में शामिल हो चुकी हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष संतोष देवी के पति प्रसन्न चौधरी के बाद अब पूर्व विधायक राव अब्दुल वारिस ने भी रालोद का दामन थाम लिया है।
रालोद में बढ़ रहा लोगों का विश्वास
रालोद जिलाध्यक्ष योगेंद्र चेयरमैन कहते हैं कि रालोद सर्वसमाज की पार्टी है। किसान आंदोलन में पार्टी प्रमुख स्व. चौधरी अजित सिंह एवं जयंत चौधरी ने आगे बढ़कर किसानों की आवाज को बुलंद किया। केंद्र और प्रदेश सरकार की जनविरोधी नीतियों से हर वर्ग परेशान है। इसलिए रालोद में जनता का विश्वास बढ़ा है। कुछ नेता जो दूसरे दलों में चले गए थे वे घर वापसी कर रहे हैं। नए लोग भी पार्टी से जुड़ रहे हैं। अभी और भी कई नेता संपर्क में हैं।