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2027 में बनेगी किसानों की सरकार, गन्ने का मिलेगा 500 रुपये दाम : वीएम सिंह

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मोदीपुरम/दौराला। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह ने कहा कि किसानों को जाति धर्म से ऊपर उठकर सरकार बनानी होगी। कोई सरकार काम नहीं करती तो दूसरी सरकार बना दी जाती है। वह भी काम नहीं करती। इसलिए अब किसानों की सरकार बनानी पड़ेगी। तब सभी मांगें पूरी हो जाएंगी। किसानों को संगठित होकर 2027 में अपनी सरकार बनानी होगी, तब गन्ने का दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा।
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रविवार को सोफीपुर मार्ग स्थित खनौदा-धंजू चौराहे पर रविवार को राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन की हुंकार महापंचायत हुई। इसमें मुख्य अतिथि सरदार वीएम सिंह ने कहा कि एमएसपी को लेकर आंदोलन चल रहें हैं, लेकिन ये बहुत कम लोग जानते है कि एमएसपी की आवाज किसने और कब उठाई। बताया कि 20 अक्तूबर सन 2000 में उन्होंने एमएसपी को लेकर आंदोलन किया था। उस दौरान रामप्रकाश गुप्ता मुख्यमंत्री थे। पहली बार ऐसा आंदोलन हुआ, जिसके छह दिन चलने पर ही मुख्यमंत्री को बदल दिया गया। आंदोलन खत्म कराने के लिए आश्वासन दिया गया, लेकिन एमएसपी की मांग पूरी नहीं की गई। तब से अब तक लड़ाई लड़ी जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था करे कि ग्रामीण क्षेत्रों के अप्रशिक्षित चिकित्सकों को एक साल का प्रशिक्षण देकर डिग्री दी जाए और इन्हें जूनियर डॉक्टर बना दिया जाए। कहा कि दूध पर भी एमएसपी मिले तो कोई गोवंश को नहीं छोड़ेगा। आजादी के बाद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और शिक्षक को जो वेतन मिलता था आज वह हजार गुना बढ़ गया है, लेकिन फसल का दाम सौ गुणा भी नहीं बढ़ सका। सरकार किसान को छह हजार रुपये देकर बेवकूफ बना रही है। विधायक अतुल प्रधान ने कहा कि वह भी किसान परिवार से आते हैं। इस दौरान मिंटू, दीपक, गुलबीर, रामवीर, अमरपाल, अपीन, दिनेश, भूपेंद्र, कैलाश, उपेंद्र, मुकुल, शेखर, वीरपाल, संदीप आदि मौजूद रहे।
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चार बार मिला राज्यसभा का मिला ऑफर
सरदार वीएम सिंह ने कहा कि उन्हें चार बार राज्यसभा का ऑफर मिला, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया। बताया कि राज्यसभा बनाने के लिए उनसे कहा गया कि गन्ना किसानों की आवाज नहीं उठाओगे और न कोर्ट जाओगे। किसान संगठन को लेकर कहा कि किसान नेता बनने से कुछ नहीं होता, बल्कि किसान की आवाज उठानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि वह भाकियू के अध्यक्ष नरेश टिकैत की इज्जत करते हैं, वह खाप से जुड़े हैं, लेकिन राकेश टिकैत क्या कर रहे हैं, उन्हें कोई लेना देना नहीं। इस दौरान रागिनी कार्यकम का आयोजन किया गया। किसानों ने रागिनी का जमकर लुत्फ उठाया और अपनी पसंद की रागिनी की फरमाइश भी की।
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