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बिजनौर: जिला अस्पताल में नवजात शिशु की मौत पर हंगामा, टॉयलेट में हुई डिलीवरी

Fri, 01 Nov 2019 06:59 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
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मामले की जानकारी देती पीड़ित महिला - फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर जनपद में जिला महिला अस्पताल में एक नवजात की जान स्वास्थ्य कर्मियों की संवेदनहीनता की भेंट चढ़ गई। प्रसव का समय नजदीक आने के बावजूद गर्भवती को दो दिन तक भर्ती नहीं किया गया। शुक्रवार को महिला को लेकर परिजन जिला महिला अस्पताल पहुंचे, तो प्रसव पीड़ा होने लगी। एक घंटे तक महिला तड़पती रही, मगर उसे भर्ती नहीं किया। फिर शौचालय में ही प्रसव होने पर नवजात की मौत हो गई। स्वास्थ्य कर्मियों की इस घोर लापरवाही पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया और सीएमओ को शिकायत पत्र देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

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नजीबाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम कनकपुर कला निवासी बलराम सिंह ने प्रसव पीड़ा होने पर अपनी पत्नी रिंकी (24) को 31 अक्तूबर को 108 एंबुलेंस से नजीबाबाद के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां से उसे जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया था। बलराम ने बताया कि जिला महिला अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच करने के बाद कह दिया कि अभी अस्पताल में सभी बेड फुल हैं। ऑपरेशन से ही प्रसव कराने की बात कहकर उसे घर भेज दिया गया। शुक्रवार को वह सुबह लगभग सात बजे फिर से अपनी पत्नी को साथ लेकर जिला महिला अस्पताल में पहुंचा। आरोप है कि वहां पर नर्स के अलावा कोई डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं मिली। गर्भवती पिंकी की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने बार-बार मिन्नत की, इसके बाद भी अस्पताल स्टाफ ने उनकी मदद नहीं की। वह यूरिन के लिए शौचालय गई तो वहीं पर प्रसव हो गया, जिसमें नवजात की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने जिला महिला अस्पताल में जमकर हंगामा किया और दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

शौचालय पर था ताला, मिन्नत करने के बाद खोला 

बलराम सिंह ने सीएमओ को दिए शिकायत पत्र में बताया कि उसकी पत्नी को यूरिन जाने के लिए ऐसी हालत में भी काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। शौचालय पर ताला लटका था। अस्पताल में मौजूद स्टाफ से ताला खुलवाने की गुहार लगाई। लेकिन काफी देर तक स्टाफ ने इसे अनसुना कर दिया। इससे महिला को पीड़ा बढ़ गई। करीब एक घंटा बाद ताला खोला गया। 

चिकित्सकों की लापरवाही का पहला मामला नहीं 
इससे पूर्व भी जिला महिला अस्पताल में प्रसव के दौरान कई नवजातों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद चिकित्सक अपने रवैये में बदलाव लाने को तैयार नहीं हैं। आए दिन इस तरह के मामले प्रकाश में आते रहते हैं। चिकित्सक डयूटी से नदारद रहते हैं और आवश्यकता पड़ने पर तिमारदार उन्हें इधर- उधर ढूंढते फिरते हैं।
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मुख्यालय पर नहीं रुकती सीएमएस 
जिला महिला अस्पताल में आने वाले अधिकांश मरीजों की शिकायत रहती है कि सीएमएस डॉक्टर आभा वर्मा मुख्यालय पर नहीं रुकतीं। वह रोजाना नजीबाबाद से आती जाती हैं। जबकि नियमानुसार सीएमएस का जिला अस्पताल मुख्यालय पर रहना जरूरी है। उन्होंने नजीबाबाद में आभा नर्सिंग होम के नाम से अपना नर्सिंग होम संचालित कर रखा है। अन्य चिकित्सा अधीक्षिका की गैर मौजूदगी में अन्य चिकित्सक और स्टाफ अपने दायित्वों को बखूबी अंजाम नहीं देता। इस कारण अक्सर ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। 

सीएमएस आभा वर्मा ने बताया कि परिजनों के सभी आरोप निराधार हैं। इलाज में कोई कोताही नहीं बरती गई है। सुबह ड्यूटी पर डॉक्टर अपराजिता सिंह थी। मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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