पुलिस के अनुसार पूछताछ में सामने आया कि फैक्टरी से लोकल के बजाय दूरदराज के शहरों में माल की सप्लाई की जाती थी। इससे किसी को शक भी नहीं होता था। इसके लिए फैक्टरी से जुड़े कुछ लोग पहले टूर करते थे। नामचीन कंपनी की हूबहू कॉपी कर यह लोग 500 से 700 रुपये में क्रिकेट बैट तैयार कर उसे 1500 से 2500 रुपये तक में बेच देते थे। ऑनलाइन सामान बेचने वाली कंपनियों को भी माल बेचा जाता था।
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कुछ और नाम आए सामने
फैक्टरी संचालक राजू सैनी ने पूछताछ में निरंकार और सुशील नाम बताए, जो एक-दूसरे की गैरमौजूदगी में फैक्टरी संभालते थे। दो लोग टूर पर रहते थे तो एक शख्स फैक्टरी में होता था। जो जितना बड़ा ऑर्डर लाता था, उसे उसके हिसाब से ही मुनाफा होता था। कौन स्टीकर डिजाइन तैयार करता था और इनकी छपाई कहां की जाती थी, इसकी जांच की जा रही है।
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