दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे निर्माण पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। बारिश और कोरोना के चलते कार्य आगे नहीं बढ़ रहा है। वहीं, दूसरी ओर किसान एक समान मुआवजे की मांग कर रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने सोमवार को किसानों की परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद उन्होंने किसान प्रतिनिधिमंडल का फोन नहीं उठाया। किसानों का कहना है कि प्रशासन ने धोखा किया है। उन्हें अब एक्सप्रेसवे का कार्य बंद कराने के लिए उतरना होगा।
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एक्सप्रेसवे पर 26 गांवों के किसान पिछले एक महीने से धरना दे रहे हैं। प्रशासन ने किसानों को 13 जुलाई को परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया था। किसानों ने बताया कि कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को फोन मिलाया लेकिन, उन्होंने जवाब नहीं दिया। जिससे अब हमें बड़ा निर्णय लेना होगा।
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किसान 11 मांगों को मनवाने के लिए सरकार पर दबाव बना रहे हैं। ऐसे में एक्सप्रेसवे का कार्य आगे मुश्किल हो सकता है। वे आज से कार्य बंद करा सकते हैं। किसानों ने चेताया कि अब आश्वासन नहीं चलेगा। किसान आंदोलन करने के लिए आगे आएंगे। प्रशासन हमें आंदोलन करने के लिए मजबूर कर रहा है। मुरादाबाद गांव में चल रहे धरने में किसानों ने आगे की रणनीति तैयार की। वे आज से एक्सप्रेसवे का कार्य बंद करा सकते हैं। इस मौके पर सतीश राठी, महबूब अली, पवन गुर्जर, हाजी जुनेद, जयचंद आदि मौजूद रहे।
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