बड़ा मकान इमामबारगाह और इमामबाड़ा जाकिर हुसैन में शहीद हजरत अली असगर की याद में हुईं मजलिसें
संवाद न्यूज एजेंसी
लावड़। मुहर्रम पर बृहस्पतिवार को नगर के बड़ा मकान इमामबारगाह और इमामबाड़ा जाकिर हुसैन में कर्बला के सबसे कम उम्र के शहीद हजरत अली असगर की याद में मजलिसें हुई। इस दौरान शबी-ए-जुलजनाह निकाला गया और अकीदतमंदों ने मातम कर शहजादी फातिमा को उनके लाल का पुरसा पेश किया। छह माह के अली असगर की शहादत का मार्मिक बयान सुनकर सोगवारों की आंखें नम हो गईं।
मजलिस में नौहाख्वानी तनवीर हसन और जावेद रजा ने की। इमामबाड़ा जाकिर हुसैन में मौलाना अली अब्बास तथा बड़ा मकान इमामबारगाह में मौलाना समद नकवी ने खिताब फरमाया। उन्होंने कर्बला के घटनाक्रम का वर्णन करते हुए बताया कि जब मैदान-ए-कर्बला में इमाम हुसैन के सभी साथी और मददगार शहीद हो गए, तब उन्होंने मदद की पुकार लगाई। इस पुकार को सुनकर झूले में मौजूद छह माह के अली असगर भी बेचैन हो उठे।
मौलाना ने बताया कि इमाम हुसैन अपने पुत्र अली असगर को गोद में लेकर फौज-ए-यजीद के सामने पहुंचे और बच्चे के लिए पानी की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि उनकी नजर में इमाम दोषी हैं तो इस मासूम का क्या कसूर है। इसके बावजूद फौज की ओर से कोई रहम नहीं दिखाया गया। बयान के अनुसार हुरमला द्वारा छोड़ा गया तीन फाल वाला तीर अली असगर के गले को चीरता हुआ निकल गया, जिससे उनकी शहादत हो गई। दर्दनाक मंजर का जिक्र होते ही मजलिस में मौजूद सोगवार फूट-फूट कर रो पड़े। मजलिस के बाद लावड़, फलावदा और महलका से आई अंजुमनों ने नौहाख्वानी और मातम किया। कर्बला के शहीदों को याद करते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। सोगवार साजिद जैदी ने बताया कि मुहर्रम की 10 तारीख शुक्रवार को नगर में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला जाएगा। इस दौरान साजिद जैदी, शानू, अय्यूब हैदर, अशरफ, आरिफ, मेहंदी अब्बास, गुड्डू एडवोकेट, शबी हसन, हसीन, नाहिद, मोहम्मद आदि मौजूद रहे।