खेल के सामान का निर्यात और भुगतान अटका
मेरठ। मेरठ खेल उपकरणों के निर्माण और निर्यात का हब है। क्रिकेट से लेकर अन्य आउटडोर और इनडोर खेलों के सामान, उपकरण व ट्रैक सूट यहां बनते हैं। जिले में करीब 35 सौ इकाइयां खेल उपकरण बनाती हैं। सरकार ने एक जिला एक उत्पाद योजना में भी खेल उद्योग ही शामिल है, लेकिन दोबारा कोरोना संक्रमण के बीच खेल उद्योग पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
पिछले साल आउटडोर खेल कम होने के कारण क्रिकेट, बास्केटबाल, वालीबाल, एथलेटिक्स सहित अन्य खेलों से जुड़े खेल उपकरणों की मांग में तेजी से गिरावट आई थी। लॉकडाउन खुलने के बाद स्थिति सामान्य हुई तो उम्मीद जगी, लेकिन संक्रमण बढ़ने से खेल कारोबार पर फिर संकट में आ गया है। बॉर्डर पर माल के कंटेनर रुके हुए हैं। मांग में तेजी से गिरावट हुई है, वहीं खेल इकाईयों के करोड़ों रुपये का भुगतान भी अटका है।
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निर्यात से घरेलू बाजार पर असर
कोरोना के कारण देश-विदेश में आउटडोर गेम के आयोजन कम हो रहे हैं। शिक्षण संस्थान बंद है। खेल उपकरणों की मांग घटी है। माल सप्लाई में परेशानी हो रही है। निर्यात व घरेलू बाजार पर कोरोना का असर है। - सुमनेश अग्रवाल, निदेशक प्रीमियर लेगगॉर्ड
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निर्यात और भुगतान पर असर
कोरोना के फिर बढ़ने से माल की सप्लाई और भुगतान अटक गए हैं। सही शिपिंग न होने के कारण ग्राहक तक माल नहीं जा रहा। सप्लाई चेन ही प्रभावित हो गई है। जहां से भुगतान आने हैं, वहां बाजार बंद हैं। माल उत्पादन पर असर पड़ा है। - अनिल सरीन, निदेशक एसएफ
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कच्चे माल की शुरू हुई किल्लत
रबड़, आयरन, कॉटन, धागे, लेदर और ट्रैक सूट के लिए जो नेट और कपड़ा प्रयोग होता है, उसकी किल्लत शुरू हो गई है। जो पुराना स्टॉक कुछ उद्यमियों के पास था, वो भी नहीं बचा। माल का आवागमन मुश्किल हो रहा है। - अनुराग अग्रवाल, अध्यक्ष आईआईए मेरठ चैप्टर
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काबिल कामगारों का अभाव
पिछले साल कोरोना में मजदूरों के पलायन के कारण काबिल कामगारों का अभाव हुआ था, ऐसे ही हालात फिर से बनने लगे हैं। कामगार लौट रहे हैं, कोरोना बढ़ा तो मुश्किल हालात पैदा हो जाएंगे। - अश्विनी गेरा खेल उद्यमी