पथराव और फायरिंग के चलते भगदड़ मच गई
पथराव करते लोग
सड़क दूधली में बृहस्पतिवार की सुबह डा. भीमराव अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में सांसद राघव लखनपाल शर्मा के नेतृत्व में शोभायात्रा शुरू हुई। गांव के अंदर शोभायात्रा पहुंचते ही दूसरे समुदाय के लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। पथराव और फायरिंग के चलते भगदड़ मच गई। पथराव में सांसद राघव लखनपाल शर्मा, उनके भाई राहुल सहित कई लोग चोटिल हो गए। दूसरे समुदाय के लोगों ने रास्ते के बीच में ट्रैक्टर लगाकर हाथों में लाठी-डंडे लेकर यात्रा के विरोध में अड़ गए। बीच में रुकी यात्रा और पथराव की खबर पर पहले डीएम और एसएसपी मौके पर पहुंचे। तनावपूर्ण स्थिति के बीच अधिकारी मूकदर्शक बने रहे। इसके बाद मंडलायुक्त और डीआईजी भी पहुंचे मगर नतीजा सिफर रहा और उनके सामने भी लगातार पथराव होता रहा। इससे गुस्साए एक पक्ष के लोगों ने तोड़फोड़ शुरू कर दी।
सांसद ने कार्यकर्ताओं के साथ एसएसपी आवास पर कब्जा किया
एसएसपी आवास पर पहुंचे भाजपाई
मंडलायुक्त एमपी अग्रवाल की गाड़ी और कई दुकानों में जमकर तोड़फोड़ की गई। वहां आगजनी की भी कोशिश की गई। इस बीच एसएसपी समेत पुलिस अफसरों और भीड़ के बीच जबरदस्त नोकझोंक, धक्कामुक्की तक हुई। पुलिस प्रशासन की लापरवाही से गुस्साए सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने कार्यकर्ताओं के साथ एसएसपी आवास पर कब्जा कर लिया। उधर, वहां मौजूद लोगों ने देहरादून रोड पर कब्जा कर लिया। सड़क पर आग लगा कर उसे जाम कर दिया और जमकर उत्पात करते रहे। इसके बाद एसएसपी आवास के बाहर भी जाम लगाकर राहगीरों से मारपीट की गई। एसएसपी आवास के बाहर एक बाइक को भी आग लगा दी गई। आवास के सीसीटीवी कैमरे और नेमप्लेट भी तोड़ दिए गए। देर शाम आईजी अजय आनंद भी मौके पर पहुंच स्थिति का जायजा लिया। डीआईजी जेके शाही का कहना है कि बिना अनुमति के शोभायात्रा निकाली जा रही थी, जिस पर कुछ लोगों ने पथराव किया है। गांव में फोर्स तैनात कर दी गई है। उत्पातियों को चिन्हित किया जा रहा है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सासंद और एसएसपी बोले...
सांसद और एसएसपी में नोकझोंक
सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने कहा कि बाबा साहब संविधान के निर्माता हैं और उनकी शोभायात्रा कोई धार्मिक मामला नहीं है। पुलिस के पास इस बवाल का इनपुट होने के बाद भी अफसरों ने लापरवाही की। सहारनपुर में तैनात अधिकारी पिछली सरकार की मानसिकता से नहीं उबर पा रहे हैं। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बातचीत के नाम पर बवालियों को समय दिया। इस पूरे प्रकरण में एसएसपी की घोर लापरवाही रही है। बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर संविधान निर्माता हैं। उनकी जयंती पर शोभायात्रा निकालने के लिए किसी अनुमति की कोई आवश्यकता नहीं है। गांव में बाबा साहब की शोभायात्रा हर हाल में निकाली जाएगी।
एसएसपी लव कुमार ने कहा कि यात्रा के लिए कोई अनुमति नहीं थी। लेकिन कुछ लोग फिर भी यात्रा निकालने का प्रयास कर रहे थे। गांव में पहले से ही एसपी सिटी के नेतृत्व में भारी फोर्स तैनात की गई थी। समाज के लोगों ने जबरन यात्रा निकालने का प्रयास किया। इसके चलते दोनों ओर से पथराव शुरू हो गया।
बेबस पुलिस के सामने उपद्रवियों का तांडव
उपद्रव के दौरान फूंकी बाइक
सड़क दूधली में पुलिस की बेबसी देख उपद्रवी लगातार उग्र होते चले गए। ढाई घंटे तक फायरिंग और पथराव होता रहा, लेकिन मौके पर मौजूद आला अधिकारी बचने के सिवा पथराव रोकने और उपद्रवियों को खदेड़ने का निर्णय ही नहीं ले सके। उपद्रवियों ने न सिर्फ पथराव किया, बल्कि जमकर तोड़फोड़ और आगजनी भी की।
मौके पर पुलिस और प्रशासन का होना सिर्फ दिखावटी ही रहा। दोनों सुमदाय पुलिस के सामने ही खुली चुनौतियां देते रहे, छतों पर ईंट, पत्थर एकत्रित करते रहे, फिर पथराव भी कर दिया, लेकिन पुलिस अफसर सिर्फ अपने आपको बचाते, छुपाते ही रह गए। कमिश्नर, डीआईजी ने न तो पथराव को रोकने का कोई प्रयास किया और न ही आमने-सामने खड़े दोनों समुदायों के लोगों को मौके से हटाया। इस बवाल को रोकने के लिए अंत तक भी अधिकारी कोई निर्णय नहीं ले सके। नतीजा यह हुआ कि एक समुदाय लौटा तो भी छतों से पथराव होता रहा। लेकिन पुलिस किसी से कुछ कहने की भी हिम्मत नहीं जुटा सकी।
तमाशबीन बने पुलिसकर्मी मांगते रहे फायरिंग के आदेश
पथराव के दौरान तमाशबीन बने पुलिसकर्मी
दोनों समुदाय ईंट, पत्थर बरसाते रहे, पुलिस पर भी पथराव किया गया। कब्रिस्तान की ओर से आकर कुछ लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। पुलिस कर्मी हेलमेट और जैकेट पहनकर अपना बचाव कर रहे थे और कब्रिस्तान से पथराव कर रहे लोगों एवं दूसरे समुदाय के लोगों के पथराव को देख रहे थे। पुलिस कर्मी लगातार अपने अधिकारियों से फायरिंग के आदेश मांगते रहे, लेकिन किसी भी अधिकारी के मुंह से एक शब्द भी नहीं निकला। यहां तक कि अधिकारियों की गाड़ियां तोड़ दी गई, लोगों ने एसएसपी को पकड़कर उनके साथ धक्कामुक्की की और गालियां भी दीं, लेकिन वह भी एक शब्द नहीं बोल सके। जिससे उपद्रवियों का हौसला बढ़ता गया तथा छोटे से मामले ने आगजनी का रूप ले लिया।
दोनों समुदाय अपनी-अपनी जिद पर अड़े रहे
पथराव के दौरान सांसद और कार्यकर्ता
सड़क दूधली में अंबेडकर जयंती शोभायात्रा में पथराव के बाद यात्रा रुक गई। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी दोनों को समझाने में जुटे रहे। एक समुदाय शोभायात्रा को आगे ले जाने की जिद पर अड़े हुए थे, जबकि दूसरे समुदाय ने साफ लहजे में चेतावनी दी थी कि शोभायात्रा को एक कदम भी आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी किसी को भी समझाने में सफल नहीं हो सके। बाद में एक समुदाय यात्रा बीच में छोड़कर एसएसपी आवास पर पहुंच गया और घेराव कर दिया।
पुलिस प्रशासन की चूक ने करा दिया बवाल
कमिश्नर की क्षतिग्रस्त गाड़ी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सड़क दूधली में पुलिस और प्रशासन की लापरवाही ने डा. भीमराव अंबेडकर शोभायात्रा में बवाल करा दिया। संवेदनशील गांव होने के बावजूद पुलिस प्रशासन की ओर से यहां पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे। इसके चलते ही उपद्रवियों को पथराव और बवाल करने का मौका मिला। यहां तक कि आला अधिकारियों के सामने भी पथराव होता रहा। लेकिन मौके पर समय से सख्ती न होने के कारण उपद्रवी हावी होते चले गए। सड़क दूधली में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के जन्मदिन के उपलक्ष्य में शोभायात्रा निकालने की पुलिस और प्रशासन को पहले ही सूचना दे दी गई थी। यहां तक कि खुफिया विभाग भी इस बारे में जानता था। लेकिन पुलिस और प्रशासन ने संवेदनशीलता पर पूरी लापरवाही बरती।
आला-अफसरों के सामने ढाई घंटे तक होता रहा पथराव
छत से पथराव करते लोग
लापरवाही की हद तो उस समय हो गई जब मौके पर सशस्त्र पुलिस बल ही नहीं बल्कि उनको आदेश देने वाले एसएसपी, डीएम, कमिश्नर और डीआईजी तक मौजूद थे। लेकिन ढाई तीन घंटे तक रह-रह कर लगातार पथराव होता रहा। शुरू में फायरिंग भी की गई। लेकिन कोई भी अफसर उसे रोकने की बजाय बड़ी अनहोनी का इंतजार करता रहा। यही नहीं पूरे पुलिस और प्रशासनिक अमले के सामने उपद्रवियों ने अपनी मनमानी दिखाई। कमिश्नर की गाड़ी पर तोड़फोड़ की गई। इसके अलावा करीब एक दर्जन दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया। एसएसपी के साथ भी धक्का-मुक्की की गई, लेकिन कोई एक शब्द भी नहीं बोल पाया।
एसएसपी की नेम प्लेट, सीसी कैमरा तोड़ा, हाइवे जाम लगाया
एसएसपी से बहस करते लोग
मामला सिर्फ गांव सड़क दूधली तक ही सीमित नहीं रहा। वहां से लौटकर आक्रोशित लोग एसएसपी आवास पर पहुंचे और वहां पर सीसीटीवी कैमरा, एसएसपी की नेम प्लेट तोड़ डाली गई। हाईवे पर जाम लगा दिया गया। आरोप है कि कुछ लोगों के साथ मारपीट भी की गई।
बिना अनुमति निकाली जा रही थी शोभायात्रा
दूकान में की गई तोड़फोड़
सड़क दूधली में बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में निकाली जा रही शोभायात्रा के लिए पुलिस प्रशासन को सूचित किया गया था। मगर इसके लिए अनुमति नहीं दी गई। इसके बावजूद सांसद समेत अन्य भाजपा नेताओं की मौजूदगी में शोभायात्रा निकली तो पुलिस प्रशासन सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए ठीक से मैनेजमेंट तक नहीं कर पाया। बता दें कि सड़क दूधली में डा. अंबेडकर और रविदास जयंती पर शोभायात्रा निकालने को लेकर पिछले करीब दस साल से विवाद चला आ रहा है। पूर्व में भी शोभायात्रा के समय पथराव हुआ है। ऐसे में सड़क दूधली को संवेदनशील माना जाता रहा है। बसपा सरकार के पांच साल के कार्यकाल में भी गांव की संवेदनशीलता को देखते हुए शोभायात्रा निकालने का प्रयास नहीं किया गया। इसके बाद सपा शासन में भी दलित शांत ही रहे। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि भाजपा नेताओं को साथ लेकर शोभायात्रा निकालने में कोई अड़चन नहीं आएगी। लेकिन हुआ वही जिसका सभी को डर था। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि इतने संवेदनशील गांव में क्या शोभायात्रा निकालने से पहले ही सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था के मुद्दे पर पुलिस प्रशासन से लेकर खुफिया विभाग को अलर्ट नहीं होना चाहिए था। उधर, कुछ लोगों का कहना है कि देहाती क्षेत्रों में निकलने वाली ऐसी शोभायात्राओं को बिना अनुमति के ही आपसी प्रबंधन और पुलिस के सहयोग से निकाला जाता रहा है। लेकिन इस संवेदनशील गांव में शोभायात्रा की तैयारी को अधिक गंभीरता से लिया जाना चाहिए था।
शोभायात्राओं को लेकर गांव-गांव हो रही है बवाल की स्थिति
उपद्रव के दौरान लोगों को समझाती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
शोभायात्राओं को लेकर गांव-गांव में बवाल की स्थिति बनती जा रहे है। पहले भी जुलूस एवं शोभायात्रा निकालने को लेकर कई गांवों बवाल हो चुका है। कभी रविदास जयंती को लेकर, तो कभी डाक्टर अंबेडकर जयंती को लेकर। विरोध करने वाले भी कोई और नहीं बल्कि उनके साथ दिन रात रहने वाले गांव के ही लोग होते हैं। सड़क दूधली गांव पर बवाली गांव होने का ठप्पा लग चुका है। इस गांव में बृहस्पतिवार को शोभायात्रा निकालने को लेकर हुआ बवाल पहला नहीं है। इससे पहले भी इस गांव में बवाल होते रहे हैं। रविदास जयंती की शोभायात्रा निकालने को लेकर हर साल बवाल होता रहा है। जिस कारण पिछले कई साल से इस गांव में रविदास जयंती की शोभायात्रा निकाले जाने पर रोक लगी हुई है। इस बार बाबा साहब डाक्टर भीमराव अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में निकाली जा रही शोभायात्रा में जमकर बवाल हुआ। एक साल पहले एक दुर्घटना के चलते भी इस गांव के लोगों ने हाईवे पर बवाल मचाया था। जिसमें तत्कालीन एसपी सिटी घायल भी हुए थे। इसके अलावा ग्राम पिकी में भी मस्जिद के सामने से शोभायात्रा निकालने को लेकर पथराव एवं बवाल हो चुका है। ग्राम हौजखेड़ी में भी शोभायात्रा निकालने को लेकर बवाल हुआ था। ग्राम सरकड़ी में शोभायात्रा के दौरान हंगामा, पथराव की घटना हो चुकी है, कुछ समय पूर्व ग्राम हरड़ा खेड़ी में भी जुलूस नहीं निकलने दिया गया था। देवबंद में भी कुछ वर्ष पूर्व जन्माष्टमी की निकाली जा रही झांकियों पर पथराव किया गया था। इसके अलावा देवबंद के ही मोहल्ला मोली तेजियान में एक समुदाय के द्वारा निकाली जा रही शोभायात्रा को विरोध कर रुकवाया गया। गांवों में शोभायात्रा को लेकर प्रतिष्ठा का सवाल बनाया जा रहा है। जबकि गांव में सभी लोग एक दूसरे के साथ रहते हैं, सभी एक दूसरे को अच्छी तरह से जानते-पहचानते भी हैं, फिर भी लोग शोभायात्रा निकालने और रोकने को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना रहे हैं। जिससे हंगामा, पथराव और बवाल के मामले बढ़ते जा रहे हैं।