ये भी हो
- हाई रिस्क यात्रियों, हेल्थ केयर वर्कर्स, सैनिटाइजेशन वर्कर्स के लिए अलग बस हो।
- मास्क पहनने और व सैनिटाइजर के इस्तेमाल के लिए कहा जाए।
- बस टर्मिनल पर मास्क पहने यात्रियों को बस में चढ़ने दिया जाए।
- सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो।
- बस में चढ़ने-उतरने के लिए अलग-अलग डोर का इस्तेमाल हो।
- बस में आवश्यकता से ज्यादा लोगों को न चढ़ने दिया जाए।
- बुजुर्ग, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता दी जाए।
- बस में चढ़ने से पहले यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग हो।
कर्मचारियों का भी रखें ध्यान
- स्टाफ डेवलपमेंट शेड्यूल बनाएं, सभी स्टाफ को इस बारे में बताएं।
- कर्मचारियों को हेल्थ केयर व इंश्योरेंस दें।
- सभी कर्मचारियों का तापमान चेक हो, कोविड-19 सिंप्टम्स वाले लोगों को काम पर न आने दिया जाए।
- ड्राइवर और कंडक्टर को एन-95 मास्क, ग्लव्ज और हैंड सैनिटाइजर दिया जाए।
- यात्रा शुरू करने से पहले ड्राइवर और कंडक्टर के हाथों को डिसइंफेक्ट किया जाए।
- हर ट्रिप से पहले कंडक्टर सुनिश्चित करे कि बस साफ हो और डिसइंफेक्ट की गई हो।
- हर दो-तीन घंटे में टर्मिनल के पब्लिक एरिया को डिसइंफेक्ट किया जाए।
- बस और टर्मिनल पर डिसइंफेक्ट की जानकारी दी जाए।
- एसी बसों में वेंटिलेशन की व्यवस्था हो, जिससे ताजी हवा आ सके।
कोरोना संकट के चलते सार्वजनिक परिवहन का स्वरूप बदल जाएगा। विभाग आईटीडीपी जैसी एक्सपर्ट एजेंसियों की गाइडलाइन को देख रहा है। सभी चीजों का ध्यान रखते हुए बसों का संचालन चुनौती है। रोडवेज की आपातकालीन सेवा जारी है। शासन का जो भी निर्देश होगा, उसका पालन होगा।
- नीरज सक्सेना, आरएम, रोडवेज मेरठ रीजन
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