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रद्द हो सकती हैं विवि-कॉलेजों की परीक्षाएं

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मेरठ। प्रदेश में कोरोना के मामले रोजाना बढ़ते जा रहे हैं। जुलाई में इन मामलों के बढ़ने की और ज्यादा संभावना है। छात्र हों या अभिभावक और शिक्षक हर कोई ऐसे माहौल में परीक्षा कराने का विरोध कर रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि हालात को देखते हुए इस बार वार्षिक और सेमेस्टर प्रणाली की परीक्षाएं कैंसिल की जा सकती हैं। सीसीएसयू के कुलपति की अध्यक्षता में बनाई गई चार सदस्यीय कमेटी अपनी रिपोर्ट सोमवार को शासन को सौंपेगी। उसके बाद शासन स्तर से परीक्षा पर फैसला लिया जाएगा।
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उत्तर प्रदेश के 20 राज्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 52 लाख 80 हजार छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। जिस तरह से पिछले कुछ दिनों से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, उसको देखकर अभी जल्दी से यह कंट्रोल होता नहीं दिख रहा है। इतना ही नहीं विशेषज्ञ इसके जुलाई में और ज्यादा बढ़ने की आशंका जता रहे हैं। ऐसे में 52 लाख 80 हजार छात्र-छात्राओं की अगर परीक्षा होती है तो बड़ी मुसीबत हो सकती है। छात्र-छात्राएं टेंपो-बसों से आते हैं। ग्रामीण इलाकों में अलग दिक्कत है। परीक्षा हॉल में सोशल डिस्टेंसिंग से बिठाना। शिक्षकों का कॉपी पर हस्ताक्षर करना। तमाम ऐसी बारीकियां हैं कि संक्रमण कहां फैल जाए कुछ नहीं कहा जा सकता है। ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर संक्रमण फैलता है तो इसको रोक पाना और भी मुश्किल हो जाएगा।
सभी पक्षों पर की है चर्चा : प्रो. एनके तनेजा
पूरे प्रदेश में परीक्षा कराने या नहीं कराने को लेकर शासन ने सीसीएसयू के कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में डॉ. भीमराव अंबेडकर विवि आगरा के कुलपति प्रो. अशोक मित्तल, छत्रपति शाहू जी महाराज विवि कानुपर की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता और डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विवि अयोध्या के कुलपति डॉ. मनोज दीक्षित की समिति का गठन करते हुए रिपोर्ट देने को कहा। समिति लगातार तीन दिन से सारे हालात पर मंथन कर रही है। सोमवार को समिति परीक्षा को लेकर अपनी सिफारिश शासन को भेजेगी। समिति के अध्यक्ष सीसीएसयू के कुलपति प्रो. एनके तनेजा का कहना है कि सभी पक्षों पर गौर किया जा रहा है। छात्रों के भविष्य के साथ उनका स्वास्थ्य देखना सबसे पहले जरूरी है। ऐसे में सोमवार तक निर्णय लेने के बाद शासन को पक्ष भेज दिया जाएगा।
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सीसीएसयू के पांच लाख से अधिक छात्र
सीसीएसयू कैंपस और कॉलेजों में दो तरह के कोर्स चलते हैं। इनमें कुछ कोर्स वार्षिक प्रणाली के होने के कारण साल में एक बार परीक्षाएं होती हैं। कुछ कोर्स सेमेस्टर प्रणाली के होने की वजह से साल में दो बार परीक्षाएं होती हैं। कॉलेजों में 22 फरवरी से वार्षिक प्रणाली की परीक्षाएं शुरू हुईं थी। लॉकडाउन होने के कारण 18 मार्च से आगे की सारी परीक्षाएं स्थगित हो गईं। इनमें पौने चार लाख छात्र-छात्राएं शामिल हैं। ये परीक्षा पूरी होगी तो इसके तुरंत बाद सेमेस्टर की परीक्षाएं हैं। इसमें डेढ़ लाख छात्र-छात्राएं हैं। सबसे ज्यादा मामला फाइनल ईयर की परीक्षाओं पर फंसा है।
कुलपति को दिया ज्ञापन
रालोद के संगठन महामंत्री डॉ. राजकुमार सांगवान ने कुलपति प्रो. एनके तनेजा को ज्ञापन सौंपकर कहा कि इस बार परीक्षाएं कैंसिल कर छात्रों को अगली कक्षाओं में प्रोन्नत करें। जिससे कि छात्रों को कोरोना संक्रमण के खतरे से बचाया जा सके। ज्ञापन में कहा गया कि कई प्रदेशों में परीक्षाएं कैंसिल करते हुए अगली कक्षा में प्रोन्नत किया जा रहा है।
कैसे रोकेंगे पेपर छूटने पर भीड़
लखनऊ विवि में परीक्षा कराए जाने को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में याचिका दायर की गई थी। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर सोशल डिस्टेंसिंग में बिल्कुल लापरवाही नहीं हो। सैनिटाइजर का इंतजाम हो। कई दूसरे प्वाइंट भी दिए गए। समिति इन सारे प्वाइंट पर भी अध्ययन कर रही है। सबसे बड़ी मुसीबत यह आ रही है कि कमरों में तो छात्रों को दूूरी पर बिठा दिया जाएगा, लेकिन एंट्री के समय क्या होगा। जब पेपर छूटेगा तो सोशल डिस्टेंसिंग कैसे कायम रखी जाएगी।
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इसलिए नहीं है परीक्षाएं होने की उम्मीद
15 जुलाई के बाद ही शुरू हो पाएंगी परीक्षाएं। 20 अगस्त से पहले वार्षिक प्रणाली और सेमेस्टर की परीक्षाएं खत्म होना संभव नहीं।
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