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भारतीय सेना की सबसे बड़ी 'जाट रेजीमेंट' के नाम से ही खौफ खाते हैं दुश्मन, आज है स्थापना दिवस

Fri, 01 Nov 2019 02:06 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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जाट रेजीमेंट
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भारतीय सेना की ताकतवर और दुश्मनों को चित करने वाली जाट रेजीमेंट की 21वीं बटालियन का 32वां स्थापना दिवस आज है। आज बरेली स्थित जाट रेजीमेंट के मुख्यालय में देश के लिए कुर्बानी देने वाले बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। ऑपरेशन रक्षक में मेरठ के भी चार जवानों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। वहीं, बागपत, गाजियाबाद, बुलंदशहर के भी एक-एक जवान इस रेजीमेंट का हिस्सा रहे थे।  

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जाट रेजीमेंट का खौफ पाकिस्तानी सेना में सबसे अधिक है। भारतीय सेना की सबसे बड़ी रेजीमेंट जाट रेजीमेंट है। सेना में सबसे अधिक पुरस्कार प्राप्त करने वाली जाट रेजीमेंट की 23 बटालियन हैं। यह सेना की सबसे पुरानी और सबसे ज्यादा वीरता पुरस्कार विजेता रेजीमेंट है। रेजीमेंट ने वर्ष 1839-1947 के बीच 19 और स्वतंत्रता के बाद आठ महावीर चक्र, आठ कीर्ति चक्र, 32 शौर्य चक्र, 39 वीर चक्र और 170 सेना पदक सहित अनेक शौर्य सम्मान प्राप्त किए हैं। अपने 200 साल से भी ज्यादा की समय सीमा में रेजीमेंट ने पहले और दूसरे विश्व युद्ध सहित भारत और विदेशों में अनेक युद्धों में भाग लिया है। युद्ध के मैदान में उतरने पर रेजीमेंट ‘जाट बलवान जय भगवान’ का नारा लगाती है।  

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ऐसे हुआ गठन
रेजीमेंट की शुरुआत 1795 कलकत्ता नेटिव मिलट्री द्वारा की गई। जो बाद में बंगाल सेना की एक इंफेंट्री बटालियन बन गई। उस दौरान ब्रिटिशों ने नोटिस किया कि भारत में सिखों के बाद जाटों ने उन्हें सबसे ज्यादा परेशान किया। वे जाट सैनिकों के दमख़म से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें बंगाल सेना में भर्ती करना शुरू किया। 1803 में 22 वीं बंगाल नेटिव इंफैंट्री की पहली बटालियन का गठन किया गया। दूसरी और तीसरी बटालियन 1817 और 1823 में बनाई गई। वहीं, जनवरी 1922 में भारतीय सेना की 9 वीं जाट रेजीमेंट का गठन किया गया।

ये रहे मेरठ के योद्धा
- सेप जयवीर                 मेरठ                    18 दिसंबर 2005         ऑपरेशन रक्षक
- सेप जगबीर                 मेरठ मवाना          12 सितंबर 2000         ऑपरेशन रक्षक
- सेप जगदीश                मेरठ                     26 जुलाई 2000          ऑपरेशन रक्षक
- सेप सुबोध तोमर          बागपत                 18 जून 1999              ऑपरेशन रक्षक
- सेम रमेश कुमार          गाजियाबाद             25 फरवरी 2000         ऑपरेशन रक्षक
- सब सरदार सिंह           मेरठ                     19 जून 1996               ऑपरेशन रक्षक
- अशोक कुमार              बुलंदशहर               18 सितंबर 1991          ऑपरेशन मेघदूत

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