फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Election 2024: चौबीसी में राजपूत दोफाड़, बिखरे वोट, बदल गए इस लोकसभा के समीकरण, वोटरों में नहीं दिखा उत्साह

Sat, 20 Apr 2024 01:38 PM IST
कपिल kapil सचिन त्यागी, अमर उजाला मेरठ

सार

Election 2024 : मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर मतदान के दौरान राजपूत दोफाड़ होता नजर आया। खास बात है कि जिन गांवों में एकतरफा वोट पड़ते थे, वहां इस बार बिखराव हुआ है। अमर उजाला की खास रिपोर्ट पढ़िए-
विज्ञापन
सरधना विधानसभा में मतदान करने जातीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

क्षत्रिय समाज में नाराजगी का असर शुक्रवार को लोकसभा चुनाव में हुई वोटिंग में साफ नजर आया। सरधना विधानसभा क्षेत्र के चौबीसी का क्षत्रिय समाज पूरी तरह से दोफाड़ दिखा। जिन गांवों में भाजपा को एकतरफा वोट पड़ते थे, आज वहां बिखराव हुआ। युवा जहां विरोध में उत्तेजित दिखे, वहीं बुजुर्गों और महिलाओं ने जरूर कुछ डैमेज कंट्रोल करने का काम किया।

विज्ञापन


मेरठ की सरधना विधानसभा सीट मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट के अंतर्गत आती है। गाजियाबाद में भाजपा द्वारा जनरल वीके सिंह का टिकट काटकर वैश्य समाज को प्रतिनिधित्व दिए जाने से क्षत्रिय समाज में विरोध के सुर जगह-जगह सुनाई दे रहे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद क्षत्रिय बहुल इलाकों में जनसभा कर रहे थे। तमाम जगहों पर पंचायतें हुईं।

वहीं, शुक्रवार को लोकसभा के प्रथम चरण के चुनाव में क्षत्रिय समाज की नाराजगी दूसरी पार्टी के वोट बैंक में बदलती नजर आई। चौबीसी के क्षत्रिय बहुल गांवों की बात करें तो खेड़ा में जहां दूसरी पार्टी के लिए वोट पाना मुश्किल होता था वहां इस बार हालात बदले नजर आए। वोटिंग में उत्साह तो कम दिखा ही वहीं आधे वोटरों ने साफ कर दिया कि वे इस बार विरोध में हैं। 

कुशावली, रार्धना, कपसाड़, ज्वालागढ़, अटेरना, चकबंदी, बड़कली, सलावा जितने भी चौबीसी के क्षत्रिय बाहुल्य गांव रहे, करीब-करीब सभी जगह यही स्थिति दिखी। यहां पर खूब साइकिल दौड़ी। महिलाओं और बुजुर्गों ने जरूर प्रदेश और देश के मुद्दों पर वोट डालने की बात कही, लेकिन युवा साफ तौर पर मुद्दों से अलग नजर आए। उनका कहना था कि हम स्थानीय मुद्दे पर ही वोट डाल रहे हैं। 

कई गांवों में स्थिति ऐसी दिखी कि लोगों में वोटिंग को लेकर उत्साह कम था। सलावा गांव के एक युवा ने बताया कि वे हर साल एक ही पार्टी को वोट डालते रहे हैं, लेकिन इस बार विरोध कर रहे हैं। युवा ने बताया कि उन्होंने तो अपना वोट दूसरी पार्टी को डाल दिया, लेकिन उनकी माता ने वोट ही डालने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि दूसरी पार्टी को वोट देने का मन नहीं है। ये स्थिति कई गांवों में नजर आई। 

क्षत्रिय समाज के लोगों का कहना था कि स्थानीय मुद्दे की वजह से ऐसा हो रहा है, जब वह विरोध कर रहे हैं। कई गांवों में जहां युवा नाराज थे वहीं, बुजर्गों और महिलाओं का कहना था कि इनको असलियत नहीं पता, हम नहीं भटक सकते हैं। पहले की तरह ही वोट देंगे। 

दलित समाज रहा इस बार एकजुट
विधानसभा चुनाव में जहां दलित समाज का रुख अलग था। वहीं, शुक्रवार को हुए चुनाव में स्थिति उलट रही। अधिकतर गांवों में दलित समाज एकजुट नजर आया। उन्होंने साफ कहा कि चुनाव में किसी मुद्दे पर वोट नहीं कर रहे हैं। अपनी पार्टी को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। इन इलाकों में हाथी खूब चिंघाड़ा। प्रजापति समाज ने भी अधिकतरों जगहों पर हाथी की सवारी की। 

त्यागी समाज के वोटों में भी दिखा बिखराव 
सरधना विधानसभा क्षेत्र में त्यागी समाज के वोटों में भी बिखराव दिखा। महादेव हो या फिर नंगला आर्डर-बेगमाबाद। लोगों का कहना था कि अपने समाज की ताकत भी तो दिखानी है। सरधना कस्बे में भी यही स्थिति नजर आई। त्यागी समाज दोफाड़ दिखा। 

यह भी पढ़ें: पढ़िए खास रिपोर्ट: एकतरफा मतदान की चर्चा ने बदल डाला हवा का रुख, राजपूतों के मतदान केंद्रों ने बढ़ाई बेचैनी
विज्ञापन

जाट-ब्राह्मण-गुर्जर और अति पिछड़े दिखे एक साथ
सरधना विधानसभा क्षेत्र में कई समाज के लोग एक ही जगह नजर आए। जाट-ब्राह्मण, गुर्जर और अति पिछड़ों में थोड़ा बहुत ही बिखराव दिखा। अधिकतर जगहों पर कमल खिलता दिखा।

यह भी पढ़ें: Election : यूपी की इस लोकसभा पर नजर आया ध्रुवीकरण, अन्य सात सीटों के वोटरों ने भी चौंकाया, पढ़ें खास रिपोर्ट
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें