ईडी के छापे के दौरान मेरठ में आदित्य गुप्ता और आशीष गुप्ता के ठिकानों से पांच करोड़ के हीरे बरामद हुए हैं। इनका शारदा एक्सपोर्ट के नाम से कालीन का कारोबार है।
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शारदा एक्सपोर्ट के ठिकानों पर मंगलवार को पहुंची थी ईडी की टीम।
- फोटो : अमर उजाला
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी व नोएडा अथॉरिटी के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी रहे मोहिंदर सिंह के चंडीगढ़ स्थित आवास से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सात करोड़ रुपये के हीरे बरामद किए गए हैं। ईडी ने नोएडा की रीयल एस्टेट कंपनी हैसिंडा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के दिल्ली, नोएडा, चंडीगढ़, मेरठ और गोवा स्थित ठिकानों पर मंगलवार को छापा मारा था, जिसमें मोहिंदर सिंह का आवास भी शामिल था। छापों में करीब एक करोड़ रुपये नकदी, 12 करोड़ रुपये के हीरे, सात करोड़ रुपये कीमत के सोने के जेवरात और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक इस प्रकरण में ईडी नोएडा अथॉरिटी के तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका की जांच भी कर रही है। इसके तहत मोहिंदर सिंह के आवास को खंगाला गया है। उनको बसपा सरकार के खास अफसरों में शुमार किया जाता था। वहीं, हैसिंडा प्रोजेक्ट प्रा. लि. के साझीदारों में शामिल मेरठ निवासी आदित्य गुप्ता और आशीष गुप्ता के पांच ठिकानों पर छापा मारा गया था। उनका शारदा एक्सपोर्ट के नाम से कालीन का कारोबार है। इस दौरान आदित्य गुप्ता के आवास से पांच करोड़ रुपये के हीरे बरामद हुए हैं।
आदित्य और आशीष ने भी नोएडा में बुलेवार्ड नाम से रिहायशी अपार्टमेंट का निर्माण किया है, जो अब ईडी की जांच के दायरे में आ चुका है। छापों के दौरान ईडी को कंपनी के निदेशकों आदि के छह बैंक लॉकरों का भी पता चला है, जिन्हें खंगाला जा रहा है। इसके अलावा कई शेल कंपनियों का भी पता चला है, जिसमें निवेशकों की रकम को डायवर्ट कर दूसरी निर्माण परियोजनाओं में निवेश किया जा रहा था। ईडी जल्द ही कंपनी के सभी पूर्व व वर्तमान निदेशकों को नोटिस देकर पूछताछ के लिए तलब करने की तैयारी में है।
स्मारक घोटाले में भी थी तलाश
बता दें कि मोहिंदर सिंह का नाम बसपा सरकार में नोएडा और लखनऊ में महापुरुषों के नाम पर बने स्मारकों व पार्कों के निर्माण में 14 अरब रुपये के घोटाले में भी सामने आ चुका है। विजिलेंस ने उनसे पूछताछ के लिए नोटिस भी जारी किया था लेकिन आस्ट्रेलिया में होने की वजह से वह पेश नहीं हुए थे। उन्हें नवंबर 2011 में नोएडा अथॉरिटी का मुख्य कार्यपालक अधिकारी बनाया गया था। इस मामले में बसपा सरकार में मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाहा और नसीमुद्दीन सिद्दीकी भी जांच के दायरे में आए थे।