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कलयुग के प्रभाव से राजा परीक्षित ने शमीक ऋषि के गले में डाला मृत सांप

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दौराला- दौराला में कथा का वर्णन करती कथा वाचिका आरा​धिका। स्रोत : आयोजक
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दौराला। दौराला कस्बे के आर्य समाज परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा वाचिका आराधिका ने राजा परीक्षित व कलयुग की कथा का वर्णन किया। कथा में उन्होंने भजनों की प्रस्तुति दी, जिसे सुनकर श्रद्धालु झूम उठे।
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कथा वाचिका ने कहा कि एक दिन राजा परीक्षित जंगल में घूमने गए थे। वहां, उन्हें शमीक ऋषि तपस्या करते हुए दिखाई दिए। कलयुग के प्रभाव के चलते उन्हें ऋषि पर क्रोध आया। उन्हें लगा कि ऋषि ने उनका सम्मान नहीं किया। बदला लेने के लिए उन्होंने पास पड़े एक मृत सांप को उनके गले में डाल दिया और महल लौट आए। इस बात की जानकारी शमीक ऋषि के पुत्र शृंगी ऋषि को हुई तो उन्हें क्रोध आया और उन्होंने राजा को श्राप दे दिया। शमीक ऋषि ने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा कि वह धर्मात्मा राजा परीक्षित थे, जिन्होंने कलयुग के प्रभाव से ऐसा किया। मुख्य अतिथि पूर्व चेयरपर्सन के पति नवीन शर्मा, श्याम विहारी रहे। इस दौरान पुरुषोत्तम उपाध्याय, सोनू, राजपाल, बीना, मीना, जतिन गुप्ता, नरेंद्र, संदीप, सोहनवीर, जितेंद्र, प्रवीण आदि मौजूद रहे।
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