मुजफ्फरनगर जनपद के चरथावल थाना क्षेत्र में लोकलाज की डर से कोई नवजात को झाड़ियों में फेंककर फरार हो गया। आवारा कुत्ते और अन्य जंगली जानवर नवजात को नोंचते रहे। तड़के कुछ युवाओं की निगाह पड़ी तो उसे अस्पताल ले गए। बाद में पुलिस जिला अस्पताल लेकर गई, लेकिन नवजात को बचाया नहीं जा सका। पुलिस ने एक ग्रामीण की तहरीर पर अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज की है।
मामला ब्लॉक के गांव मुथरा का है। रविवार सुबह करीब पांच बजे कुछ ग्रामीण नंदकुमार ने श्मशान घाट की दीवार से सटी झाड़ियों से किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनी। उसने युवक मोनू और संदीप को जानकारी दी। उन्होंने मौके पर देखा तो एक नवजात बच्ची कपड़े में लिपटी खून से लथपथ पड़ी थी। इंसानियत दिखाते हुए युवक उसे उठाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। वहां चिकित्सकों ने उसका उपचार किया, लेकिन संसाधनों के अभाव में बाद में उसे स्वामी कल्याणदेव राजकीय चिकित्सालय रेफर कर दिया गया। हिंडन चौकी प्रभारी संजय त्यागी ने नवजात की जान बचाने के लिए प्रयास शुरू किए। महिला कांस्टेबल को नवजात की सुरक्षा में लगा दिया। पुलिस उसे जिला अस्पताल लेकर आई। यहां उपचार शुरू हुआ, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। पुलिस ने ग्रामीण संदीप की तहरीर पर अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस नवजात को झाड़ियों में फेंकने वाले की तलाश में जुटी है।
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सात साल की सजा का प्रावधान
अधिवक्ता तरसपाल पुंडीर के अनुसार आईपीसी की धारा 317 के अंतर्गत सात साल की कारावास या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। 12 वर्ष से कम आयु के शिशु का माता-पिता या उसकी देखरेख करने वाले व्यक्ति द्वारा पूर्णतया: परित्याग करना इस धारा के अंतर्गत आता है।