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सहारनपुर: खूंखार हो रहे कुत्ते, हर रोज किसी न किसी को बना रहे निशाना, मुश्किल हुआ बच्चों को बचाना

Wed, 26 Jun 2019 03:27 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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यूपी के सहारनपुर जनपद में आवारा कुत्ते अब इंसानों पर हमले कर रहे हैं। शहर से लेकर देहात तक कुत्तों का आतंक बना हुआ है। बेहट के गांव दयालपुर में मासूम बालक को कुत्तों ने मार डाला। ऐसी घटनाएं पहले भी होती रही हैं। जिला अस्पताल में रोजाना 40 से 45 लोग कुत्तों के हमले में घायल होकर पहुंच रहे हैं। बावजूद इसके प्रशासन चिंता नहीं कर रहा है। नगर निगम भी बेपरवाह है। 
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मंगलवार को बेहट के गांव दयालपुर में मासूम को कुत्ते उठाकर ले गए और खेत में ले जाकर उसको मार डाला। इससे पहले भी जिले में कुत्तों के हमले में लोगों की जिंदगी खत्म होने की घटनाएं सामने आई हैं। घटनाओं के बाद प्रशासन की तरफ से ऐसा कोई प्लान नहीं बनाया गया, जिससे खूंखार कुत्तों से छुटकारा दिलाया जा सके।

अब हालत यह है कि शहर के मंडी समिति रोड, खाता खेड़ी, नूर बस्ती, पुराना कलसिया रोड, नुमाइश कैंप, सुभाषनगर सहित विभिन्न इलाकों में कुत्तों का आतंक है। शहर के लोग कई बार नगर निगम से इसकी शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन कुत्तों के आतंक से मुक्ति नहीं मिल पा रही है। 
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दयालपुर में है कुत्तों से दहशत 
दयालपुर गांव में कुत्तों का आतंक आज ही नहीं हुआ, बल्कि काफी दिनों से चल रहा है। इससे पहले करीब एक वर्ष पूर्व इसी गांव में संजय की एक वर्षीय बेटी को कुत्ते घर से उठाकर ले गए थे और नोचकर मार डाला था। करीब एक माह पूर्व ही गांव मुर्तजापुर निवासी धर्म सिंह सैनी को खेत में काम करते समय कुत्तों ने हमला कर बुरी तरह जख्मी कर दिया था, जिसकी पीजीआई चंडीगढ़ में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। 

कुत्तों के हमले की प्रमुख घटनाएं 
गत 19 मई को ही गंगोह क्षेत्र के गांव कुतुबखेड़ी में अर्नव (4 वर्षीय) पुत्र राजू को कुत्तों ने नोचकर मार डाला था। इसके बाद 22 मई को गंगोह के गांव बिलासपुर में किसान श्याम सिंह के बछड़े को कुत्तों ने मार दिया था।
चार जून को गांव कुतुबखेड़ी में ही रहने वाले कमल की पांच वर्षीय बेटी को कुत्तों ने हमला करके घायल कर दिया था, जबकि गंगोह की रामबाग कालोनी में राकेश गर्ग पर कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया था। इसके अलावा करीब दो साल पहले गांव लखनौती में कुत्तों के झुंड ने हमला करके महिला सफाई कर्मी को मार डाला था। 

वहीं, सहारनपुर शहर में तीन साल पहले नगर निगम का कमेला बंद होने के बाद खूंखार कुत्तों ने हमला करना शुरू किया। तीन बच्चों को नोचकर जख्मी कर दिया था। बीते वर्ष गांव शेखपुरा कदीम में खेल रहे बच्चों पर कुत्तों ने हमला किया था। एक बालक को खींचकर धान के खेत में ले जाने के बाद नोच-नोचकर मार डाला था। नूरबस्ती में छह साल की लड़की को नोचकर मार डाला था। 

नहीं बन सका कुत्तों का नसबंदी सेंटर 
नगर निगम ने कुत्तों की नसबंदी पर पूर्व में करीब नौ लाख रुपये खर्च किए थे। इसके बाद भी शहर में कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं, नगर आयुक्त से पिछले दिनों ही भाजपा नेता यशपाल त्रेहन सहित अन्य लोगों ने सुभाषनगर और अन्य मोहल्लों में कुत्तों के आतंक की शिकायत की थी।

तब नगर आयुक्त ने कहा था कि जल्दी ही कुत्तों का नसबंदी सेंटर शहर में बनवाया जाएगा, ताकि कुत्तों की संख्या में बढ़ोतरी न होने पाए। बावजूद इसके अब तक कुत्तों का नसबंदी केंद्र नहीं बन सका है। 

भीषण गर्मी और भूख हो सकती है वजह : वाईपी सिंह 
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाक्टर वाईपी सिंह का कहना है कि कुत्तों द्वारा हमले करने के पीछे दो ही मुख्य वजह हो सकती है। पहली वजह गर्मी है,जिससे कुत्तों की प्रवृति हिंसक हो सकती है, तो दूसरी वजह भूख है। खाना नहीं मिलने की वजह से कुत्ते खाने की तलाश में निकलते हैं और जो मिल जाए, उसी को खाने की सोचते हैं। 
 
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 यह बरतें सावधानी 
- कुत्ता कुछ खा पी रहा हो तो उसके पास न जाएं। 
- अगर कुत्ते के पिल्ले उसके साथ हों उसके नजदीक न जाएं। 
- कुत्ते आपस में लड़ रहे हों तो भी उनसे दूर रहें। 
- सोते हुए कुत्ते को न छेड़ें। 
- कुत्तों के एकदम नजदीक से भागदौड़ न करें। 
- बच्चों को भी बताएं, कुत्तों के कान और पूंछ आदि न खींचें। 
- रात में बच्चों को खुले आंगन में सोने में सावधानी बरतें 

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