जिला अस्पताल में बरामदे में मरीजों को देखते चिकित्सक।
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मेरठ। पीएल शर्मा जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में मंगलवार को भी विद्युत सप्लाई बाधित रही। हर रोज 125 तक होने वाले एक्सरे सिर्फ आठ हो सके। इसी तरह पैथोलॉजी लैब में 100 से ज्यादा जांचें नहीं हो सकीं। अल्ट्रासाउंड वाले मरीजों तक को लौटना पड़ा। मरीज और तीमारदार दिनभर परेशान रहे। शाम करीब छह बजे विद्युत सप्लाई चालू हो सकी।
सोमवार को भी यही स्थिति थी। मंगलवार को सुबह साढ़े छह बजे फिर लाइन में फाल्ट होने के कारण विद्युत सप्लाई बाधित हो गई। जेनरेटर से सुबह साढ़े 11 बजे तक बिजली सप्लाई दी गई, लेकिन इसके बाद जेनरेटर भी गर्म होकर बंद हो गए। इसके बाद बिजली गुल रहने के कारण बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) के लिए हाथ से पर्चे बनाने पड़े। दोनों अस्पतालों में सीलिंग फैन नहीं चलने के कारण दिनभर तीमारदार मरीजों पर पंखे झलते रहे। काफी मरीज ऐसे भी रहे, जो बिना जांच कराए और चिकित्सक को दिखाए ही लौट गए। अंधेरे के कारण चिकित्सक भी मोबाइल की रोशनी और खिड़की से आ रही रोशनी में जैसे-तैसे मरीज देखते रहे। पसीने में तरबतर रहे। मरीजों-तीमारदारों का कहना था कि गर्मी के बावजूद जिला अस्पताल में मरीजों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। सोमवार को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाने वाले विभाग में बिजली नहीं होने कारण चिकित्सक को बरामदे में बैठना पड़ा था।
33 केवीए के केबल में हुई गड़बड़ी
अधिशासी अभियंता ट्रांसमिशन राहुल नंदा ने बताया कि जिला अस्पताल में 33 केवीए का केबल में बर्स्ट हो जाने के कारण बिजली की परेशानी रही। जिला अस्पताल में मेडिकल कॉलेज के ट्रांसमिशन से बिजली आती है। जिला अस्पताल में अपना इंडिपेंडेंट फीडर है। केबिल को सोमवार को ठीक करा दिया गया था। शाम में बिजली आ गई थी, लेकिन मंगलवार सुबह फिर गड़बड़ी हो गई। जिला अस्पताल की तरफ से शिकायत मिलने पर लाइन को शताब्दीनगर के फीडर से जोड़ दिया गया, लेकिन केबल ठीक नहीं हुआ था, जिस कारण दो सीटी उड़ गए। शाम को केबल ठीक होने पर विद्युत सप्लाई सुचारु हो सकी।