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बाइक बोट घोटाले में 90 करोड़ का हिसाब न देने वाला दिनेश पांडे दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार

Sat, 21 Nov 2020 07:36 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

- ईओडब्ल्यू मेरठ सेक्टर की टीम  बाइक बोट घोटाले में 57 मुकदमों की कर रही है जांच
-  मुकदमा दर्ज होते ही विदेश भाग गया था दिनेश पांडे
-  दुबई से आकर जैसे ही दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा मेरठ पुलिस ने की घेराबंदी
-  लुक आउट नोटिस जारी कर आरोपी की तलाश में थी ईओडब्ल्यू की पुलिस
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dinesh pandey - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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3500 करोड़ रुपए के बाइक बोट घोटाले में यूपी पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) मेरठ सेक्टर की टीम ने शनिवार को दिनेश पांडे को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया। नोएडा में दर्ज 57 मुकदमों की ईओडब्ल्यू मेरठ सेक्टर की टीम जांच कर रही है। इस मामले में अभी तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

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ईओडब्ल्यू के एसपी मेरठ डॉ राम सुरेश यादव का कहना है कि दिनेश पांडे मुकदमा दर्ज होते ही दुबई भाग गया था जिसका लुकआउट नोटिस जारी किया गया। तभी से टीमें लगी थीं। जैसे ही वह दुबई से आकर दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरा को गिरफ्तार कर लिया गया है।

एसपी डॉ. रामसुरेश यादव के अनुसार, दिनेश पांडे पुत्र राजमनी पांडे मूलनिवासी गांधी नगर दिल्ली, जो नोएडा में रहता था। नोटिस देने के बाद भी वह बयान देने नहीं आ रहा था। साल 2017 में बाइक बोट का प्रकरण शुरू हुआ तो दिनेश पांडे संजय भाटी व बिजेंद्र सिंह हुड्डा के साथ मिलकर अलग-अलग कंपनियों व संपत्तियों में पैसा निवेश किया।
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गर्वित और इंडिपेंडेंट टीवी से उसकी कंपनी में लगभग 150 करोड रुपए आए थे। उन पैसों का जब हिसाब पूछा गया तो लगभग 60 करोड़ ही गर्वित व इंडिपेंडेंट टीवी को वापस करना तथा शेष बची धनराशि को दिनेश पांडे ने जमीन जायदाद यूनिवर्सिटी व ट्रस्ट में निवेश किया।

दिनेश पांडे का संपर्क 2012 में बिजेंद्र सिंह हुड्डा से हुआ। जिसकी पेंटल टेक्नोलॉजी लिमिटेड नामक फर्म थी। जो टेबलेट बनाने व बेचने का काम करती थी। 2017 में बिजेंद्र सिंह हुड्डा ने दिनेश पांडे से संपर्क किया और कहा कि हम दोनों कंपनियों में रियल स्टेट में एक साथ काम करते हैं।

दिनेश पांडे ने 5 करोड रुपए अपनी जोनिथ टाउनशिप में निवेश कर लिया। बिजेंद्र हुड्डा व संजय भाटी से लगभग डेढ़ सौ करोड रुपए अपने विभिन्न कंपनियों के खाते में प्राप्त किया। इन ट्रांजिक्शन की कोई लिखा पढ़ी अथवा एग्रीमेंट नहीं हुई थी।

संजय भाटी, बिजेंद्र सिंह हुड्डा, बीएन तिवारी वीके शर्मा तथा इनका आपस में तालमेल इस दौरान हो गया। जीआईपीएल के निवेशकों का भारी मात्रा में धन जीआईपीएल उसकी सिस्टर कंपनी के द्वारा खोले गए खातों में जमा हो रहा था जिस को ठिकाने लगाने की योजना इन लोगों ने बनाई।
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इस वजह से दिनेश पांडे ने बद्री नारायण तिवारी, बिजेंद्र सिंह हुड्डा, संजय भाटी के साथ मिलकर नोबेल कोऑपरेटिव बैंक के विजय कुमार शर्मा के साथ संधि करके नोबल कोऑपरेटिव बैंक में विभिन्न कंपनियों के खाते खुलवाए तथा जीआईपीएल एवं इंडिपेंडेंट टीवी तथा अन्य सिस्टर कंपनियों के खातों में जमा हो रहे जीआईपीएल के निवेशकों के धन को इन्होंने अपनी कंपनियों के खातों में हस्तांतरित किया और वहां से विभिन्न छोटी कंपनियों तथा चैरिटेबल संस्थाओं के खातों में ट्रांसफर कराकर  अवैध लाभ प्राप्त किया।

 दिनेश पांडे ने अपनी कंपनी सामग्र इंडस्ट्री, सामक रियल्टी प्रा लिमिटेड, जोनिथ टाउनशिप प्रा लिमिटेड, फेयर टाउनशिप प्रा लिमिटेड तथा सागाशिप मैनेजमेंट प्रा लिमिटेड नामक कंपनी में पैसे का लेनदेन संजय भाटी, सचिन भाटी, बिजेंद्र हुड्डा, बीएन तिवारी, इन लोगों के रिश्तेदारों एवं अन्य डायरेक्टर द्वारा संचालित कंपनियों में किया गया। जब से मुकदमा दर्ज हुआ था तब से दिनेश पांडे विदेश में था। नोबेल कॉआपरेटिव बैंक के संस्थापक और सीईओ वीके शर्मा को ईओडब्ल्यू मेरठ सेक्टर की टीम ने 3 दिन पहले गिरफ्तार किया था।

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