पेट्रोल पंपों से डीजल मिलना बंद, डिपो से 10 हजार लीटर खरीद जरूरी, मुश्किल में उद्यमी
बिजली कटौती के बीच जनरेटर संचालन पर संकट
डीएसओ से औद्योगिक संगठनों ने मांगा समाधान
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सरकार द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंधों के बाद औद्योगिक इकाइयों को अब सीधे पेट्रोल पंपों से डीजल नहीं मिल पा रहा है। जिससे उद्योग जगत में चिंता बढ़ गई है। बिजली कटौती के बीच डीजल की उपलब्धता बाधित होने से उत्पादन और कारोबार दोनों प्रभावित है। लाइट जाने पर जेनरेटर भी नहीं चल पा रहे हैं।
सरस्वती इंडस्ट्रियल क्षेत्र मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने बताया कि सरकारी आदेश के बाद पेट्रोल पंपों ने उद्योगों को डीजल देने से मना कर दिया है। अब उद्योगों को डीजल सीधे कंपनी के डिपो से खरीदना होगा। डिपो से डीजल लेने के लिए लगभग 10 हजार लीटर की खरीद आवश्यक है। जो छोटे उद्योगों के लिए संभव नहीं है। सुरक्षा संबंधी सख्त नियम भी हैं और कई एनओसी लेनी होंगी। डीजल नहीं मिलने से उद्योग बंदी के कगार पर हैं।
आईआईए के वरिष्ठ पदाधिकारी अनुराग अग्रवाल ने कहा कि अधिकांश लघु एवं मध्यम उद्योगों को प्रतिमाह केवल 500 से 700 लीटर डीजल की आवश्यकता होती है। पहले उद्यमी पेट्रोल पंप से डीजल मिल जाता था लेकिन अब यह सुविधा समाप्त हो गई है। डिपो से डीजल लेने का नियम पूरा होना संभव नहीं है। इस संबंध में डीएसओ को भी अवगत कराया गया है। उन्होंने मदद का आश्वासन दिया है।
ध्यानचंद नगर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल पुंडीर ने बताया कि किसी भी छोटे या मध्यम उद्यमी के लिए 10 हजार लीटर डीजल खरीदना व्यावहारिक नहीं है। इतनी बड़ी मात्रा में डीजल के सुरक्षित भंडारण के लिए अलग व्यवस्था करनी होगी। विभिन्न विभागों से आवश्यक अनुमति भी प्राप्त करनी पड़ेगी। पेट्रोल पंप से डीजल लेने पर लगाई पाबंदी हटाई जानी चाहिए।
परतापुर इंडस्ट्रियल एस्टेट एसोसिएशन के अध्यक्ष निपुण जैन ने कहा कि लगातार हो रही बिजली कटौती और डीजल उपलब्धता में आई बाधा के कारण उद्योगों के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। 220 केवीए क्षमता का जनरेटर एक घंटे में लगभग 22 लीटर डीजल की खपत करता है। ऐसे में बिजली आपूर्ति बाधित होने पर उत्पादन कार्य प्रभावित होना स्वाभाविक है।
राजकुमार बंसल ने कहा कि सरकार छोटे और मध्यम उद्योगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए डीजल आपूर्ति व्यवस्था में व्यावहारिक समाधान निकाला जाना बहुत जरूरी है।