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डीएफओ और वन रेंजर में आरोप प्रत्यारोप से मची खलबली

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डीएफओ और वन रेंजर में आरोप प्रत्यारोप से मची खलबली
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बिजनौर। डीएफओ और वन रेंजर के बीच आरोप प्रत्यारोप की लड़ाई शुरू हो गई है। वन रेंजर ने वन संरक्षक मुरादाबाद को शिकायत पत्र भेजकर डीएफओ पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें नियम विरुद्ध कार्य कराने, बिजनौर में सागौन की पौध होने के बावजूद तमिलनाडु से पौध मंगाने और चहेते ठेकेदारों से कार्य कराने का आरोप लगाया है। वहीं, डीएफओ ने रेंजर पर ड्यूटी में लापरवाही सहित कई आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ चार्जशीट तैयार होने की बात कही है। दोनों अफसरों के बीच आरोप प्रत्यारोप से विभाग में खलबली मची हुई है।
रेंजर शरद गुप्ता ने वन संरक्षक को भेजी शिकायत में बताया कि डीएफओ अधीनस्थ कर्मचारियों को दबाव में डालकर फर्जी बिल बनवाते हैं। ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ चार्जशीट बनाने या निलंबित करने की धमकी दी जाती है। डीएफओ ने अपने कार्यकाल में कितने कर्मचारियों को किस वजह से निलंबित किया और फिर किस आधार पर बहाल किया, इसकी जांच होनी चाहिए। यह भी आरोप है कि अपने चहेते ठेकेदारों से काम कराया जाता है और कमीशन लिया जाता है। इसके अलावा पौधरोपण के लिए नियम विरुद्ध ट्रैक्टर व मशीन से गड्ढे खुदवाने, नर्सरी में कमरा निर्माण कराए बगैर बिल लगवाने, सोलर पंप भी बिना लगवाए ही बिल बनवाने और 2600 किमी दूर अपने गृह राज्य तमिलनाडु से दो लाख रुपये के सागौन के पौधे मंगवाने का आरोप भी लगाया है। रेंजर ने कहा कि उनका भी छह माह से वेतन नहीं दिया गया है, जबकि वन संरक्षक कार्यालय से उनका वेतन पास किया जा चुका है।
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उधर, डीएफओ डा. एम सेम्मारन ने सभी आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि रेंजर ने नीलगाय का शिकार करने वाले एक व्यक्ति को सेटिंग कर छोड़ दिया। नर्सरी में 1.3 लाख पौधे तैयार नहीं कराए। पैसे लेकर पलेज की खेती कराते हैं। वह ड्यूटी पर भी नहीं आ रहे हैं। बिना सूचना दिए छुट्टी चले गए तो वेतन कैसे मिल सकता है। उनके खिलाफ चार्जशीट तैयार की गई है, इसी कारण बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।
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