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दहकते अंगारों पर चले शीतला माता के भक्त

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दहकते अंगारों पर चले शीतला माता के भक्त
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हस्तिनापुर। कस्बे की न्यू ब्लॉक कॉलोनी में चल रही पांच दिवसीय पूजा के अंतिम दिन दर्जनों श्रद्धालुओं ने माता शीतला देवी को मनाने के लिए दहकते अंगारों के कुंड में नंगे पैर चलकर, मुंह और शरीर के कई हिस्सों में लोहे के त्रिशूल आरपार कर पूरे कस्बे में शोभायात्रा निकाली। श्रद्धालुओं की भक्ति और आस्था देखकर लोग भाव विभोर हो गए।
न्यू ब्लॉक कॉलोनी स्थित शीतला माता मंदिर कमेटी की ओर से कस्बे में माता शीतला की वार्षिक पूजा चार दशकों से की जा रही है। पिछले पांच दिनों चल रही इस विशेष पूजा में श्रद्धालु प्रतिदिन माटी की एक हांडी में अखंड ज्योति सिर पर रखकर पूरे कस्बे में शांति और खुशहाली के लिए प्रत्येक घर पर गए। रविवार को पांचवें दिन दर्जनों श्रद्धालुओं ने कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए माता को प्रसन्न करने के लिए पूजा अर्चना की।
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श्रद्धालुओं ने माता शीतला और भगवान कार्तिकेय की मूर्ति की भव्य शोभायात्रा निकाली। कई स्थानों पर यात्रा का स्वागत किया गया। माता शीतला मंदिर पर यात्रा का समापन हुआ। मंदिर प्रांगण में 10 फीट लंबे, तीन फीट चौड़े और ढाई फीट गहरे कुंड में श्रद्धालु अखंड ज्योति लेकर दहकते अंगारों पर चले। दर्जनों लोगों ने माता में आस्था रखते हुए अंगारों पर चलकर माता के दरबार में अपनी भक्ति और आस्था का नमूना पेश किया, जिसे देखकर सभी आश्चर्यचकित रह गए। इस पूजा में आंध्रप्रदेश, दिल्ली, बर्मा से काफी श्रद्धालु शामिल होने के लिए आते हैं। परंतु इस बार कोरोना संक्रमण के चलते कुछ ही श्रद्धालु पहुंचे। माता को प्रसन्न करने के लिए दर्जनभर श्रद्धालुओं ने अपनी जीभ, गालों के बीच और छाती की त्वचा के आरपार त्रिशूल डालकर पूजा की। उनके शरीर से न तो खून ही निकला और न ही मुख से आवाज निकली। भक्तों के मुंह त्रिशूल पार करने का कार्य पुजारी करते हैं।
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नहीं पड़ती दवा की जरूरत
श्रद्धालुओं ने बताया कि माता की शक्ति से आग में चलने पर उनके पैरों में छाले नहीं पड़ते। यदि कोई जख्म हो भी जाता है तो किसी चिकित्सक से कोई दवा लेने की जरूरत नहीं पड़ती। माता पर विश्वास ही हमारे जख्मों को भर देता है।
इलाज कराने नहीं आया कोई
सीएचसी प्रभारी डॉ. अंकुर त्यागी का कहना है कि अगर यह मामला है तो जांच का विषय है। उनके पास इस प्रकार का कोई व्यक्ति इलाज कराने नहीं आया।
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