जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन कारी इस्हाक गोरा
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प्रदेश की योगी सरकार द्वारा पेश किए गए बजट में तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को पांच सौ रुपये प्रतिमाह पेंशन का एलान किया है। वहीं देवबंदी उलमा ने इसे पीड़ित महिलाओं के साथ हमदर्दी नहीं बल्कि भद्दा मजाक करार दिया है।
मंगलवार को जारी बयान में जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को योगी सरकार के बजट में पांच सौ रुपये महीना पेंशन का एलान किया गया है। मैं समझता हूं कि यह महिलाओं के साथ मजाक है। पांच सौ रुपये महीना एक महिला के लिए क्या मायने रखते हैं, यह सोचने पर मजबूर करता है। क्योंकि यह रकम दो दिन के लिए भी कम है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार को पीड़ित महिलाओं के लिए कम से कम पांच हजार रुपये प्रतिमाह का एलान करना चाहिए। तभी हमें लगेगा की सरकार इन महिलाओं की हमदर्द है और इनके लिए कुछ करना चाहती है। उन्होंने कहा कि पांच सौ रुपये पेंशन सुनकर भी हैरत होती है।
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तंजीम अबना-ए-दारुल उलूम के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती याद इलाही कासमी का कहना है कि आज के महंगाई के दौर में पांच सौ रुपये क्या मायने रखते हैं इसका अंदाजा सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके मंत्रियों को भी होगा, लेकिन उसके बावजूद तीन तलाक पीड़ित महिलाओं के लिए पांच सौ रुपये महीना पेंशन का एलान करना सीधे- सीधे उनके साथ एक मजाक है। उन्होंने कहा कि अगर हकीकत में योगी सरकार इन महिलाओं से हमदर्दी रखती है और इनके दुख को बांटना चाहती है तो यह रकम बढ़ाकर 5 से 10 हजार रुपये प्रतिमाह होनी चाहिए।
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