मजलिस इत्तेहाद-ए-मिल्लत के प्रदेशाध्यक्ष मुफ्ती अहमद गौड़ का कहना है कि पुलिस प्रशासन सरकार के इशारे पर दोहरे मापदंड अपना रहा है। नमाज मस्जिदों में अदा होनी चाहिए इससे इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन नमाज एकता का प्रतीक है इसे भी झुठलाया नहीं जा सकता। पार्क में नमाज पढ़ने से रोका जाना यह सरकार का एक समुदाय के साथ सौतेला व्यवहार है, जबकि दूसरे धर्मों के विशेष आयोजनों के दौरान बाजारों से होकर निकालने वाले जुलूसों के चलते घंटों आवाजाही प्रभावित होती है और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस पर कभी किसी ने ऐतराज नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार सबकी है इसलिए सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह सभी के लिए व्यवस्था कराए।
मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि नमाज पढ़ने पर रोक लगाया जाना बेहद अफसोसनाक है। हिंदुस्तान में हर धर्म के लोग रहते हैं और उन्हें अपने मजहब के मुताबिक जिंदगी गुजारने और इबादत करना का पूरा अधिकार है। मुसलमान कोई बड़ा आयोजन कर घंटों इबादत नहीं करता बल्कि उसे नमाज अदा करने के लिए चंद मिनट लगते हैं। इसमें किसी को कोई परेशानी भी नहीं होती। नमाज पर पाबंदी लगाया जाना शर्मनाक है। नोएडा पुलिस को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।
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