डिलीवरी से पहले अगर किसी महिला को डेंगू होता है तो फिर नवजात में भी डेंगू का वायरस सक्रिय हो सकता है। चिरंजीव अस्पताल में भर्ती बुलंदशहर निवासी हिना के 12 दिन की नवजात में डेंगू वायरस की पुष्टि होने के दावों के बाद चिकित्सकों को गर्भाशय में डेंगू का वायरस ट्रांसफर होने के पुख्ता साक्ष्य मिले हैं। प्रसव से पहले महिला में डेंगू वायरस पॉजिटिव पाया गया था। अब हालत बिगड़ने पर नवजात की भी जांच कराई गई तो उसमें भी डेंगू वायरस एनएस-1 सक्रिय पाने का दावा किया गया है। चिकित्सक इस केस को पूरी दुनिया में डेंगू वायरस के ट्रांसफर होने का पहला केस मानकर चल रहे हैं। क्योंकि मेडिकल साइंस में ऐसा कोई केस सामने नहीं आया है।
चार मीनार मस्जिद, गुलावठी बुलंदशहर निवासी हिना को प्रसव पीड़ा के बीच 17 सितंबर को हापुड़ के देवनंदिनी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जिसमें बच्ची पैदा हुई थी। प्रसव के कुछ समय बाद ही नवजात की हालत भी बिगड़ने लगी। तेज बुखार होने पर नवजात का देवनंदिनी अस्पताल में ही इलाज चलता रहा। लेकिन उसकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ। जिसके बाद परिजन बुधवार को नवजात को लेकर इंदिरा चौक स्थित डॉ. नीरज कांबोज के चिरंजीव अस्पताल लेकर पहुंचे तो डॉ. कांबोज ने तत्काल नवजात का डेंगू टेस्ट कराया।
डॉ. कांबोज के अनुसार नवजात में सारे लक्षण डेंगू के थे। परिजनों ने भी बताया था कि प्रसव से पहले उसकी मां को भी डेंगू था। ऐसे में जांच कराई गई तो रिपोर्ट में डेंगू वायरस एनएस -1 पॉजिटिव आया। हालांकि रिपोर्ट में आईजी-जी और आईजी-एम (इंफेक्शन की हिस्ट्री) निगेटिव आई है। जो किसी भी व्यक्ति के शरीर में वायरल के बाद डिजीज की हिस्ट्री को बताता है। ऐसे में साफ हुआ कि नवजात में डेंगू वायरल है लेकिन डिजीज पैदा नहीं हो पाई। अब डेंगू वायरल होने के कारण ही उसकी प्लेटलेट्स नीचे जा रही हैं।
वर्ल्ड का रेयर केस
शहर के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एसपी सौंधी का कहना है कि यह वर्ल्ड का रेयर केस हैं। क्योंकि अभी तक गर्भाश्य में पलने वाले बच्चे को महिला से गर्भ में ही एचआईवी ट्रांसफर होने के केस मिलते हैं। क्योंकि गर्भ में बहुत सारा लिक्विड होता है और बच्चा उसी में लिपटा रहता है। जिससे बच्चे को एचआईवी होने की संभावना रहती है। अगर गर्भ में नहीं होता है तो फिर डिलीवरी के समय बच्चे के एचआईवी संक्रमित होने का खतरा रहता है। इसलिए चिकित्सक एचआईवी पीड़ित महिला की सीजेरियन डिलीवरी करने की सलाह ज्यादा देते हैं। अब डेंगू का गर्भ में ट्रांसफर होने का अलग तरह का मामला सामने आया है। क्योंकि अभी तक मेडिकल साइंस की हिस्ट्री में कोई ऐसा मामला हमने नहीं पढ़ा है। हालांकि वायरस गर्भ में ट्रांसफर होने के साथ स्तनपान से भी होता है लेकिन इस मामले में मां के दूध से डेंगू वायरस ट्रांसफर होने की बात बिना किसी स्टडी के कहना संभव नहीं है।
कोट
नवजात में डेंगू के लक्षण दिखाई दे रहे थे। परिजनों ने बताया था कि उसकी मां को प्रसव से पहले डेंगू था। इसका बाद मुझे शक हुआ तो डेंगू की पूरी जांच कराई तो उसमें साफ हो गया कि बच्ची में डेंगू वायरस है। साथ ही चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि मां से बच्चे में डेंगू वायरस ट्रांसफर हुआ, जो मेडिकल साइंस का रेयर केस है। - डॉ. नीरज कांबोज, बाल रोग विशेषज्ञ (निदेशक चिरंजीव हॉस्पिटल)
थ्योरी के हिसाब से वायरस जा सकता है। लेकिन डेंगू का वायरस इस तरह से जाने का पहला मामला है। क्योंकि अभी तक कोई ऐसा केस न पढ़ा है और न सामने आया है। बच्ची की बॉडी में डेंगू का वायरस है, जिससे साफ होता है कि वो उसकी मां से ही ट्रांसफर हुआ है।-
डॉ. विनीत सक्सेना, बाल रोग विशेषज्ञ (आनंद हॉस्पिटल)