किसान विरोधी कानून और बिजली की बढ़ी दरें वापस लेने की मांग
मवाना। उत्तर प्रदेश किसान सभा ने राष्ट्रपति के नाम न्यायिक तहसीलदार को ज्ञापन दिया। जिसमें किसान विरोधी कानून और बढ़ी बिजली की दरें वापस लेने की मांग की है।
किसान सभा ने राष्ट्रपति के नाम न्यायिक तहसीलदार रामचंद्र को दिए ज्ञापन में कहा कि 2014 के चुनाव में किसानों से जो वादा किया था उसे लागू करने के बजाय किसानों को मंडियों में दलालों के हाथों लुटने के लिए छोड़ दिया है। स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने की बजाय मोदी सरकार शांता कुमार समिति की सिफारिशों को अमल में लाने की कोशिश कर रही है। जिससे संदेह है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को सरकार हटाने का षडयंत्र रच रही है।
2015 से 2020 तक विद्युत निगम द्वारा बिजली दरों में 36 प्रतिशत वृद्धि कर किसानों, मजदूरों, दस्तकारों, लघु उद्योगों की कमर तोड़ी जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए तीनों किसान विरोधी कानून, बिजली बिलों में हुई बढ़ोत्तरी को तुरंत वापस लिया जाए, किसानों की फसलों की खरीद को सुनिश्चित कर खरीद की गारंटी दी जाए, श्रम कानूनों में किए गए बदलाव तुरंत सुधारे जाएं, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को तुरंत लागू किया जाए। ज्ञापन देने वालों में मंडलीय सचिव कामरेड जितेंद्रपाल सिंह, जिलाध्यक्ष संग्राम सिंह, बिल्लू, कुलदीप देशवाल, विश्वजीत सिंह, राजपाल शर्मा, मनोज धामा, रामबीर सिंह, इंद्रपाल सिंह, कालूराम, वेदप्रकाश, सत्यपाल त्यागी आदि थे।