दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के पांचवें चरण में मेरठ के नौ गांव शामिल हैं। यहां लगभग 1600 पेड़ काटे जाने हैं। एनएचएआई को पेड़ काटने की अनुमति वन विभाग से मिल गई है।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के हापुड़ रोड से गाजियाबाद तक बनाए जाने वाले पांचवें चरण का कार्य शुरू कर दिया गया है। इस चरण में 14 किमी के निर्माण कार्य का जिम्मा एपीएस हाइड्रो कंपनी को दिया गया है।
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कंपनी ने मेरठ की ओर से गांवों में जमीन को समतल करने का काम कराया जा रहा है ताकि वर्ष 2024 तक कार्य को खत्म किया जा सके। यह निर्माण कार्य पूरा होने के बाद मात्र 50 मिनट में सीधे शास्त्रीनगर, जागृति विहार से दिल्ली पहुंच जाएंगे। इस चरण के कार्य का शुभारंभ तीन अप्रैल को सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने किया था। हालांकि उस दिन किसानों के विरोध के कारण कार्य बाधित हुआ था।
पेड़ काटने की मिली अनुमति
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के पांचवें चरण में मेरठ के नौ गांव शामिल हैं। यहां लगभग 1600 पेड़ काटे जाने हैं। एनएचएआई को पेड़ काटने की अनुमति वन विभाग से मिल गई है। अब जल्द पेड़ काटे जाएंगे। इससे कार्य की रफ्तार ओर तेज होगी। इसके लिए अगले एक महीने का लक्ष्य रखा गया है।
चंदसारा के ग्रामीणों ने किया विरोध
वहीं, शनिवार को चंदसारा के ग्रामीणों ने यहां चल रहे कार्य का विरोध किया। उन्होंने कहा कि साल 2010 मेें एक हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर मुआवजा तय किया गया। इसके बाद साल 2015 में 600 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया। इसके चलते विरोध किया जा रहा है।
शनिवार को चंदसारा में चल रहे कार्य को रोक दिया गया है। किसानों ने एनएचएआई परियोजना निदेशक अरविंद कुमार से कहा कि वह अपनी समस्या जिलाधिकारी के समक्ष भी रखेंगे। इस मौके पर नीरज त्यागी, अमित त्यागी, वेदप्रकाश त्यागी, जितेेंद्र त्यागी, अतुल त्यागी आदि मौजूद रहे।