काठा गांव में यमुना में नाव डूबने की दर्दनाक हादसे के बाद बृहस्पतिवार को अलीमुद्दीन (75) की मौत हो गई। उसके बेटे रियाजुद्दीन का कहना है कि इस हादसे में कई मौतें देखने के बाद से सदमे होने के कारण बुजुर्ग की मौत हो गई। कुछ लोगों का कहना है कि अलीमुद्दीन अक्सर यमुना किनारे जाते थे। हादसे के समय पड़ोस के ही कई लोगों की मौत से उन्हें गहरा आघात लगा था।
नाविक रिजवान की तलाश में जुटी पुलिस
काठा गांव के चौकीदार सलाऊद्दीन की तहरीर पर आरोपी नाविक रिजवान निवासी बागपत के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी हुई है। हालांकि अभी तक आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
मुनेश की मौत हुई थी, सूची में लिख दिया मनीष
काठा नाव हादसे में मारे गए 19 ग्रामीणों के पोस्टमार्टम और सूची तैयार करने में स्वास्थ्य विभाग गफलत में रहा। मुनेश की मौत हुई, पोस्टमार्टम कराया गया। सूची जारी की गई तो मुनेश की जगह मनीष दर्ज कर लिया गया। अब मरने वाली महिलाओं की संख्या 14 हो गई है। ग्राम प्रधान का कहना है कि मनीष नाम का कोई व्यक्ति उनके गांव का हादसे का शिकार नहीं हुआ है। यमुना नदी से गोताखोरों ने जैसे ही शव निकाले। पुलिस ने उनको पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया था। चिकित्सकों की टीम ने उनका पोस्टमार्टम किया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अफसरों को जारी की गई सूची में दर्शाया गया कि मनीष पुत्र रामपाल की मौत हुई है। जबकि इस नाम के किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई। गांव में मुनेश पत्नी रमेश की मौत हुई। उसका पोस्टमार्टम भी हुआ। लेकिन टीम ने सूची में उसका नाम दर्ज नहीं किया। इससे पता चलता है कि टीम पूरी तरह से गफलत में थी। अफसरों ने भी इस पर ज्यादा ध्यान नहीं किया। गांव में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्राम प्रधान के पति सतवीर सिंह का कहना है कि नाव हादसे में मनीष नाम के किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है। उधर सीएमएस डॉ. बीएलएस कुशवाहा का कहना है कि हो सकता है कि सूची में गलती हो गई हो। ऐसी गलतियां ठीक कराई जाएंगी।
काठा का गम बांटा, मदद का भरोसा दिलाया
यमुना किनारे मृतकों के चप्पल।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
नाव हादसे में 19 लोगों की मौत के बाद गमजदा परिवारों का दुख बांटने के लिए दिनभर लोगों की आवाजाही रही। भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत पहुंचे। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहायता कम है। इसे बढ़ाया जाना चाहिए। हादसे की वजह अवैध खनन है। इस पर भी प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
शुक्रवार को काठा गांव में लोगों के आने का सिलसिला जारी रहा। आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीण पीड़ितों को हिम्मत बंधाने पहुंचे। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों को सांत्वना दी। भाकियू कार्यकर्ताओं के साथ वह पीड़ित परिवारों से मिले और हर संभव मदद दिलाने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि सरकार को हादसे की वजह जानकर कार्रवाई करनी चाहिए। जो आर्थिक मदद दी गई है, वह कम है। इससे किसान और मजदूर का घर कैसे चलेगा। अवैध खनन करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। यही नहीं किसानों को नदी पार कराने के लिए विशेष इंतजाम करने चाहिए। भाकियू किसान-मजदूरों को हक दिलाने के लिए संघर्ष करने से भी पीछे नहीं हटेगी। सपा नेता अतुल प्रधान भी कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहायता बढ़ाई जानी चाहिए। शामली के पूर्व कांग्रेस विधायक पंकज मलिक ने पीड़ित परिवारों को सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि सरकार की लापरवाही से यह हादसा हुआ है। किसानों के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए। यह बेहद दुखद है। आर्थिक सहायता बढ़ाई जानी चाहिए। बसपा के पूर्व विधायक लोकेश दीक्षित ने कहा कि हादसा भयावह है। सरकार को मदद बढ़ानी चाहिए। कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामकुमार चौधरी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य सतीश प्रधान, रालोद नेता सुखबीर सिंह गठीना, ओमवीर ढाका, जिला पंचायत सदस्य वीरेंद्र तेजान, सुदेश चौहान, रालोद जिलाध्यक्ष ठाकुर प्रदीप सिंह, बागपत ब्लॉक प्रमुख सुभाष गुर्जर, देशखाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह, खेकड़ा ब्लॉक प्रमुख जितेंद्र धामा, भाजपा नेता संजय प्रजापति ने काठा में लोगों का गम बांटा।
काठा की गलियों में सन्नाटा, घरों में चीख-पुकार
काठा गांव में पसरा सन्नाटा।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
काठा में नाव हादसे के बाद गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा है। दुकानें बंद रहीं। किसान खेतों पर नहीं गए। घरों में महिलाओं की मातमी चीख-पुकार से हर किसी की आंख में आंसू भर आए। सबकी जुबान पर हादसे का जिक्र रहा। लोगों ने कहा कि भयावह हादसे के गम से उबरने में गांव का न जाने कितने साल लगेंगे।
काठा के 19 लोगों की जिंदगी यमुना में समा गई। यह घटना पर गम और गुस्सा ही था जिस वजह से लोग सड़कों पर उतरे और विरोध किया। शुक्रवार को गांव में मातमी सन्नाटा था। गलियां सुनसान रही। वाहनों की आवाजाही ही सन्नाटे को तोड़ रही थी। दुकानों के शटर गिरे थे और अधिकतर शिक्षण बंद रहीं। कुछ शिक्षण संस्थाएं खुली भी, लेकिन इनमें बच्चों की संख्या कम रही। यहां मृतकों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया।
दलित बस्ती के घरों में महिलाओं की चीख-पुकार मची रही है। दरअसल, गांव में इसी बस्ती और आसपास के क्षेत्र में ही सबसे अधिक लोग हादसे में हताहत हुए हैं। पीड़ित परिवारों को ढांढस मिलते ही, उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। घरों में पहुंचे लोगों ने हिम्मत बंधाई। किसी का भाई चला गया तो किसी की बहन। किसी के सिर से पिता का साया उठा। घटना को लेकर कई तरह की चर्चाएं रहीं तो बवाल की वजह पुलिस-प्रशासन को बताया गया। काठा में दिनभर सन्नाटे का माहौल ही रहा।
सीओ का वायरलेस सेट गायब, 60 पर मुकदमा
यमुना में शव की तलाश करते पीएसी के जवान।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
काठा गांव में नाव हादसे के बाद सीओ बागपत का गायब चल रहा वायरलेस सेट अभी तक नहीं मिला है। पुलिस ने बवाल करने वालों पर शिकंजा कस दिया। पांच लोगों को नामजद करते और 60 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के आधार पर उनकी पहचान शुरू कर दी है।
नाव हादसे में 19 सवारियों की मौत के बाद ग्रामीणों ने दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर शवों को रखकर जाम लगा दिया था। इसे लेकर भारी बवाल हुआ था। वाहनों में तोड़फोड़ कर एक गाड़ी में आग लगा दी गई थी। दरोगा अमन सिंह ने तहरीर दी कि कुछ लोगों ने सरकारी कार्य में बाधा डालते हुए तहसीलदार बागपत, पीएसी समेत कई वाहनों में तोड़फोड़ की गई। बाल संरक्षण अधिकारी की गाड़ी को पलटकर उसमें आग लगा दी गई। भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया। इसमें कोतवाली प्रभारी दिनेश कुमार, बागपत एसडीएम के अर्दली वीर सिंह उर्फ बोबी समेत कई घायल हुए। उनका अस्पताल में उपचार हुआ। सीओ का वायरलेस सेट भी गायब हो गया। इस मामले में गांव के ही कालू उर्फ कृष्णपाल पुत्र सुभाषचंद, कालू पुत्र वेदपाल, डाक्टर विवेक पुत्र सतपाल, वकील पुत्र ननुआ, संजीव उर्फ नीटू पुत्र सतपाल उर्फ वीरे को नामजद करते हुए करीब 60 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस अफसरों ने गोपनीय रूप से बवालियों की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के आधार पर पहचान शुरू कर दी है।
इनसेट
ये हुए घायल
* बागपत सीओ दिलीप सिंह
* कोतवाली प्रभारी दिनेश कुमार
* बागपत एसडीएम अर्दली वीरसिंह
* एचसीपी भगवत प्रसाद
* कांस्टेबल सतीश सिंह
* महिला कांस्टेबल सुमन
* शव वाहन के चालक मनोज शर्मा
* जिला अस्पताल के वार्ड ब्वाय राकेश कुमार
यह हुआ नुकसान
* बाल संरक्षण अधिकारी की गाड़ी में आग लगाई
* तहसीलदार बागपत की गाड़ी में तोडफ़ोड़ की
* शव वाहन में की गई तोडफ़ोड़
* पीएसी की गाड़ी में की तोडफ़ोड़
* सीओ का वायरलेस सेट गायब हुआ
डूबी थी यमुना में, नहीं मिला इलाज
काठा गांव की महिला गीता ने बताया कि वह भी नाव में डूबी थी। बड़ी मुश्किल से पानी से निकली थी। इतना बड़ा हादसे होने के कारण गम में डूब गई थी। परिजन उसको शुक्रवार को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां पर चिकित्सकों ने उसका उपचार नहीं किया तथा खानापूर्ति करके वहां से टरका दिया। इस पर जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी जाहिर की है।
हादसे के बाद टूटी प्रशासन की नींद, रेत माफियाओं को सूचीबद्ध कर कार्रवाई की शुरू
बड़ौत। काठा गांव में हुए हादसे के बाद पुलिस-प्रशासन की नींद टूटी। एसडीएम ने अब अवैध रेत खनन करने वाले माफियाओं को सूचीबद्ध करने की कार्रवाई शुरू कर दी है और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि काठा में हादसे की बड़ी वजह अवैध खनन रहा है। बृहस्पतिवार को काठा गांव में रेत माफियाओं द्वारा बनाये गये कुंड में नाव पलटने से हुई लोगों की मौत के बाद भी बृहस्पतिवार रात कोताना, शबगा, टांडा में रेत माफिया सक्रिय रहें और पूरी रात रेत खनन हुआ। शुक्रवार को पुलिस-प्रशासन की नींद टूटी तो उन्होंने रेत माफियाओं पर कार्रवाई करने की तैयारी शुरू की। एसडीएम अरविंद कुमार द्विवेदी ने बताया कि यमुना नदी में अवैध रेत खनन करने वालों को सूचीबद्ध किया जा रहा है। कुछ लोगों को सूचीबद्ध कर दिया है। उनके खिलाफ सख्त कारवाई की जाएगी। किसी भी हाल में अवैध रेत खनन नहीं होने दिया जाएगा।