संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व शांति, सुख-समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 39वें दिन धार्मिक वातावरण में विविध अनुष्ठान संपन्न हुए। शुभारंभ विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रोच्चार के साथ किया। स्वर्ण कलश से अभिषेक नितिन जैन व वैभव जैन ने किया। शांति धारा सुशील जैन परिवार ने कराई।
दीप प्रज्ज्वलन मिनी जैन, वंदना एवं अंजलि जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांति धारा का उच्चारण किया। भगवान आदिनाथ की पूजा-अर्चना के उपरांत सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य अर्पित कर भक्तामर विधान प्रारंभ हुआ। इस दौरान 451 परिवारों की सहभागिता से 48 अर्घ्य अर्पित कर धर्मलाभ अर्जित किया गया।
मंगल प्रवचन में मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि तृष्णा, लालसा और वासना मनुष्य को कभी संतुष्ट नहीं होने देतीं। तृष्णा और तृप्ति एक साथ संभव नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन के यथार्थ को समझना चाहिए और यह स्मरण रखना चाहिए कि जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है। न कोई कुछ लेकर आया है और न ही कुछ लेकर जाएगा।
विधान का विसर्जन नीरज जैन व रेणु जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती मनीष जैन और भगवान आदिनाथ की आरती नितिन जैन, वैभव जैन, वासु, शिवांश व अमन-रिया जैन ने संयुक्त रूप से की। इस मौके पर अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन सहित अन्य सदस्यों का सहयोग रहा।
कैलाश पर्वत मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद