- मां की तबीयत बिगड़ी तो बेटे ने संभाली जिम्मेदारी
संवाद न्यूज एजेंसी
दौराला (मेरठ)। कांवड़ यात्रा में जहां शिवभक्तों की आस्था के अनेक रंग दिखाई दे रहे हैं, वहीं सास-बहू के रिश्ते की एक भावुक मिसाल भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। दिल्ली के शाहदरा निवासी परिवार की बहू काजल चौधरी (55) अपनी 92 वर्षीय सास चंद्रो देवी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से गंगाजल यात्रा करा रही हैं।
हाईवे पर जैसे ही यह कांवड़ दौराला क्षेत्र से गुजरी तो श्रद्धालुओं और राहगीरों की निगाहें उसी पर टिक गईं। लोगों ने रुककर बुजुर्ग महिला के दर्शन किए और परिवार के इस समर्पण की सराहना की। परंतु, दौराला पहुंचने पर काजल की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्होंने अपने बेटे मनीष को कॉल दौराला बुला लिया। अब आगे की कांवड़ यात्रा की जिम्मेदारी मनीष संभालेंगे।
मनीष ने बताया कि उसकी दादी चंद्रो ने उसकी मां काजल से कांवड़ लाने की इच्छा जाहिर की थी। मां दादी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से लौट रही थी। मां की उम्र अधिक होने के कारण उनकी दौराला पहुंचने के बाद तबीयत बिगड़ गई। मनीष ने बताया कि अब वह मां की कांवड़ यात्रा को पूरा करेगा। उसने कांवड़ को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने का संकल्प लिया। परिवार के अन्य सदस्य भी साथ रहे। बेटे का अपनी मां के प्रति यह समर्पण देख आसपास मौजूद लोग भी भावुक हो उठे।
रास्ते में कई स्थानों पर शिवभक्तों और स्थानीय लोगों ने कांवड़ रोककर चंद्रो देवी को पानी पिलाया, उनका हालचाल पूछा और परिवार का उत्साह बढ़ाया। हाईवे पर गुजरने वाले लोग इस अनोखी कांवड़ को देखने के लिए रुकते रहे। काजल चौधरी ने बताया कि वह दूसरी बार अपनी सास को कांवड़ यात्रा करा रही हैं। इस बार दोनों की कांवड़ यात्रा का जोड़ा भी पूरा हो गया। उन्होंने कहा कि सास-बहू का रिश्ता केवल पारिवारिक औपचारिकता नहीं, बल्कि सम्मान, विश्वास और अपनत्व का रिश्ता है।