मेरठ। जिले में 17 (सोमवार) से 31 जुलाई तक दस्तक अभियान चलाया जाएगा। इस बार दस्तक अभियान के तहत चिह्नित संभावित मरीजों की सूची सीधे ई-कवच पर अपलोड की जाएगी। यह काम अभियान में जुटीं आशा कार्यकर्ता करेंगी।
जुलाई में विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 17 से 31 जुलाई तक दस्तक अभियान चलाया जाएगा। अभियान के तहत आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को संचारी रोगों के प्रति सचेत करेंगी और साफ-सफाई के प्रति जागरूक करेंगी। वह बताएंगी कि घर और घर के आसपास मच्छरों को पनपने से कैसे रोका जा सकता है। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर टीबी के संभावित रोगियों की पहचान करेंगी। लंबे समय से बुखार, खांसी जैसे लक्षणों वाले मरीजों के बारे में भी जानकारी लेंगी। उनका नाम, पता, मोबाइल नंबर सहित पूरा विवरण ई-कवच पोर्टल पर अपलोड करेंगी। इस डिजिटल प्लेटफार्म पर ही प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी आवश्यक जांच पोर्टल पर रेफर करेंगे। जांच रिपोर्ट भी ऑनलाइन रहेगी ताकि संबंधित व्यक्ति उसे खुद देख सके। इसके साथ ही दस्तक अभियान के तहत क्षय रोगियों को भी खोजा जाएगा।
जिला मलेरिया अधिकारी सत्य प्रकाश ने बताया कि जुलाई में मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। मच्छर जनित रोग भी बढ़ते हैं, इसलिए विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान काफी महत्वपूर्ण है। घर व आसपास साफ सफाई रखें। अनावश्यक रूप से पानी न भरने दें। आमतौर पर बरसात में घर की छतों पर रखे गैर उपयोगी पात्रों में पानी भर जाता है, जिसमें मच्छर पनपने लगते हैं, कोशिश करें कहीं भी पानी न भरे।
क्या है डेंगू
डेंगू संक्रमित मादा एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर दिन में ही सक्रिय रहता है और ज्यादा ऊंचाई तक उड़ने में असमर्थ होने के कारण घुटने से नीचे ही काटता है।
बरतें सावधानी
यह मच्छर रुके हुए साफ पानी में पनपता है। डेंगू का लार्वा घर के अंदर फ्रिज या एसी की ट्रे, कूलर में पनपता है। कूलर का पानी नियमित रूप से बदलते रहें और एक सप्ताह में कूलर को अच्छी तरह से साफ करने के बाद प्रयोग करें। इस मौसम में पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें और सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। वहीं ई कवच एक एप है, जिसे आशा कार्यकर्ता अपने मोबाइल फोन पर डाउनलोड कर पेपरलेस काम करती हैं। इसी एप के माध्यम से सर्वे और जरूरी काम किए जाते हैं। डाटा फीड किया जाता है।
डेंगू : साल दर साल
साल मरीज
2016 183
2017 660
2018 153
2019 199
2020 35
2021 1668
2022 348
2023 02