वर्ष 1989 में राजीव गांधी सरकार में शाहबानो के केस को लेकर दारुल उलूम से फतवा जारी हुआ
वर्ष 1998 में गोवंश कटान को लेकर दारुल उलूम ने फतवा जारी कर मुस्लिमों से गाय न काटने की अपील की
वर्ष 2005 में मुजफ्फरनगर में हुए गुड़िया प्रकरण में दारुल उलूम से जारी फतवा चर्चा का विषय बना
वर्ष 2008 में आतंकवाद के खिलाफ दारुल उलूम से फतवा जारी हुआ। जिस पर पूरी दुनिया में बहस छिड़ी
वर्ष 2016 में राष्ट्रगीत वंदेमातरम पर जारी हुआ फतवा
वर्ष 2016 में मुस्लिम महिलाओं के घर से बाहर जाकर नौकरी करने पर फतवा जारी हुआ
वर्ष 2017 में तंग व चुस्त बुर्का और कपड़े पहनने को लेकर फतवा दिया गया
वर्ष 2018 में बैंकिंग सेक्टर में नौकरी करने वाले लोगों के यहां शादी न करने की सलाह देने वाला फतवा जारी हुआ
कुरआन हदीस को मानने वाला फतवे को भी मानता है : मेहरबान
हाफिज मेहरबान कासमी का कहना है कि दारुल उलूम या दूसरी संस्थाओं से जो कोई भी फतवा लेता है वे उस पर अमल भी जरूर करता है। कुरआन और हदीस को मानना वाला फतवे को मानता है। मुफ्ती किसी भी सवाल का जवाब शरीयत की रोशनी में देते हैं जो उनकी निजी राय नहीं होती।
अधिकांश लोग फतवों को मानते व अमल करते हैं: असदुल्लाह
कारी असदुल्लाह कासमी का कहना है कि शरीयत की रोशनी में किसी भी सवाल का जवाब मुफ्तियों द्वारा दिया जाता है। फतवा वो ही व्यक्ति लेता है जिसे इसकी जरूरत होती है। अब वे इस पर अमल कर रहा है या नहीं इससे मुफ्तियों का कोई मतलब नहीं होता। अधिकांश लोग फतवों को मानते हैं और उन पर अमल भी करते हैं।
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